साल 2026 के लिए पद्म अवॉर्ड्स का ऐलान, पद्म श्री से सम्मानित होंगी बंगाल की ये 11 हस्तियां

केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की सूची जारी कर दी है, जिसमें पश्चिम बंगाल की 11 हस्तियों को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. इन नामों में साहित्य, शिक्षा, कला और चिकित्सा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल हैं.

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प्रोसेनजीत चटर्जी और तरुण भट्टाचार्य समेत पश्चिम बंगाल की 11 शख्सियतों को पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया. (Photo: Instagram) प्रोसेनजीत चटर्जी और तरुण भट्टाचार्य समेत पश्चिम बंगाल की 11 शख्सियतों को पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना गया. (Photo: Instagram)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:01 PM IST

केंद्र सरकार ने इस साल पद्म पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट जारी कर दी है. यह देश के सबसे बड़े नागरिक पुरस्कारों में से एक है, और इसके विजेताओं की लिस्ट हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित की जाती है. ये अवॉर्ड अलग-अलग फील्ड में दिए जाते हैं, जैसे कला और सोशल वर्क से लेकर पब्लिक अफेयर्स, साइंस, इंजीनियरिंग, खेल और सिविल सर्विस तक.

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'पद्म विभूषण' असाधारण और विशेष सेवा के लिए दिया जाता है. 'पद्म भूषण' उच्च स्तर की विशेष सेवा के लिए और 'पद्म श्री' किसी भी फील्ड में विशेष सेवा के लिए दिया जाता है. साल 2026 के लिए 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री का ऐलान ​हुआ है. पश्चिम बंगाल की 11 शख्सियतों को भी पद्म श्री के लिए चुना गया है. 

अशोक कुमार हलधर- साहित्य एवं शिक्षा 
गंभीर सिंह योनजोन- साहित्य और शिक्षा 
हरि माधब मुखोपाध्याय (मरणोपरांत)- कला 
ज्योतिष देबनाथ- कला 
कुमार बोस- कला 
महेंद्र नाथ रॉय- साहित्य एवं शिक्षा 
प्रोसेनजीत चटर्जी- कला 
रबीलाल टुडू- साहित्य एवं शिक्षा
सरोज मंडल- मेडिसिन 
तरुण भट्टाचार्य- कला
तृप्ति मुखर्जी- कला

अशोक कुमार हलधर: एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और लेखक हैं, जिन्हें मुख्य रूप से जापानी और भारतीय संस्कृतियों के बीच सेतु के रूप में जाना जाता है. जापान में जन्मे और भारत में सक्रिय अशोक कुमार हलधर ने जापानी भाषा की कई महत्वपूर्ण कृतियों का हिंदी और बंगाली में अनुवाद किया है. वह रबींद्रनाथ टैगोर के साहित्य और जापानी संस्कृति के अंतर्संबंधों पर अपने शोध और लेखन के लिए जाने जाते हैं.

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गंभीर सिंह योनजोन दार्जिलिंग और कालिम्पोंग क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित वनस्पतिशास्त्री (Botanist), शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनका जन्म 1939 में कालिम्पोंग के सिंजी बस्ती (Sinji Busty) में हुआ था. उन्होंने हिमालयन साइंस एसोसिएशन (Himalaya Science Association) की स्थापना की. वह हिमालयी पारिस्थितिकी (Ecology) और औषधीय पौधों पर लिखी गई कई प्रभावशाली पुस्तकों के लेखक हैं. उन्होंने जैव विविधता और स्वदेशी ज्ञान (Indigenous knowledge) के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

हरि माधब मुखोपाध्याय एक प्रसिद्ध भारतीय रंगमंच निर्देशक, नाटककार और अभिनेता हैं. वह मुख्य रूप से बंगाली थिएटर में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने 'अन्याय थिएटर' (Anyay Theatre) नामक थिएटर ग्रुप की स्थापना की थी, जो पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के नकाशिपारा में स्थित है. उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित नाटकों का निर्देशन और लेखन किया है. उनके काम अक्सर ग्रामीण बंगाल की समस्याओं और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाते हैं.

ज्योतिष देबनाथ: पश्चिम बंगाल के कालना, पूर्वी बर्धमान के एक प्रसिद्ध पारंपरिक बुनकर हैं, जो मलमल (Muslin) और जामदानी साड़ियों की सदियों पुरानी कला को पुनर्जीवित कर रहे हैं. वह और उनके पुत्र राजीव देबनाथ 500-काउंट तक के महीन धागों का उपयोग करके हाथ से तैयार उत्कृष्ट और जटिल डिजाइनों के लिए जाने जाते हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं.

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कुमार बोस: भारत के प्रसिद्ध तबला वादक और संगीतकार हैं. वह बनारस घराने से ताल्लुक रखते हैं और प्रसिद्ध तबला वादक पंडित किशन महाराज के शिष्य हैं. उनकी वादन शैली में शक्ति और लय का अनूठा मिश्रण है. उन्होंने विश्व स्तर पर कई प्रसिद्ध कलाकारों के साथ संगत की है और एकल वादन में भी महारत हासिल की है.

प्रो. महेंद्र नाथ रॉय: एक जाने-माने भारतीय केमिस्ट और एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेटर हैं. वह वर्तमान में नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी (NBU) में साइंस और आर्ट्स फैकल्टी के डीन हैं और केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में सीनियर प्रोफेसर हैं. वह अलीपुरद्वार यूनिवर्सिटी के संस्थापक वाइस-चांसलर थे (दिसंबर 2020 – अप्रैल 2022). उन्होंने नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी में UGC-SAP (स्पेशल असिस्टेंस प्रोग्राम) के कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम किया.

प्रोसेनजीत चटर्जी: बंगाली फिल्म उद्योग (टॉलीवुड) के एक दिग्गज अभिनेता और प्रोड्यूसर हैं. वह मशहूर अभिनेता बिस्वजीत चटर्जी के बेटे  हैं. उन्हें उनके प्रशंसक प्यार से 'बम्बा दा' (Bumba Da) बुलाते हैं. उन्होंने पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक बंगाली सिनेमा पर राज किया है. प्रोसेनजीत ने 1968 में एक बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी और तब से 350 से अधिक फिल्मों में काम किया है. उनकी कुछ यादगार फिल्मों में 'अमर संगी', 'चोखेर बाली', 'ऑटोोग्राफ', 'मोनेर मानुष', 'जातिश्वर' और 'गुमनामी' शामिल हैं. उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बनाई है, विशेष रूप से फिल्म 'शंघाई' (2012) और हाल ही में वेब सीरीज 'जुबली' (2023) में उनके प्रदर्शन को काफी सराहा गया. उन्हें कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कारों (पूर्व) से सम्मानित किया जा चुका है.

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रबीलाल टुडू: मुख्य रूप से संताली साहित्य के एक प्रमुख भारतीय लेखक और नाटककार हैं. उन्हें उनके प्रसिद्ध नाटक 'पारसी खातिर' (Parsi Khatir) के लिए वर्ष 2015 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनका जन्म 21 दिसंबर 1949 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के नोवारा गांव में हुआ था. लेखन के अलावा, वह बैंकिंग क्षेत्र से भी जुड़े रहे हैं और बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत थे. टुडू ने मंच और रेडियो के लिए कई नाटक लिखे हैं, जो संताली समाज और संस्कृति पर आधारित हैं.

सरोज मंडल: एक अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ हैं, जिन्हें 20 वर्षों का अनुभव है. उन्होंने 1994 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एमबीबीएस किया, साथ ही कार्डियोलॉजी में एमडी और सुपरस्पेशियलिटी डीएम की डिग्री भी हासिल की. उन्हें कार्डियक इमेजिंग, कार्डियक कैथेटराइजेशन, कोरोनरी आर्टेरियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग सहित विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं का व्यापक अनुभव है. उन्हें पेसमेकर और अन्य उपकरणों के प्रत्यारोपण का भी अनुभव है. उन्होंने 5 पुस्तकों में संपादकीय योगदान दिया है और लगभग 100 लेख प्रकाशित किए हैं.

तरुण भट्टाचार्य: एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय संगीतकार हैं जो संतूर बजाने के लिए जाने जाते हैं. वह 'मैहर घराने' से ताल्लुक रखते हैं और महान सितार वादक पंडित रविशंकर से शिक्षा प्राप्त की है. उन्होंने संतूर में महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए हैं. तरुण भट्टाचार्य ने 'मेंड' (एक सुर से दूसरे सुर तक निर्बाध रूप से जाना) की तकनीक विकसित करने के लिए संतूर पर बारीक तार जोड़े, जिससे इस वाद्ययंत्र पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को बजाना आसान हो गया.

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