BJP-कांग्रेस-AAP... दिल्ली के पिछले 4 चुनावों में तीनों पार्टियों का वोट प्रतिशत कैसे बदलता गया?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले चार चुनावों का ट्रेंड क्या कहता है और आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में से किस पार्टी ने किस चुनाव में क्या खोया और क्या पाया?

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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST

केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की सत्ता के लिए विधानसभा चुनाव का कुरुक्षेत्र सज चुका है. केंद्र शासित प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 8 फरवरी को आने हैं. दिल्ली की गद्दी के लिए जारी सियासी घमासान के बीच बात दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी के उभार और फिर अंगद के पैर की तरह सत्ता में पांव जमा लेने और कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चुनावी प्रदर्शन की भी हो रही है. आइए, नजर डालते हैं कि  किसने कब कितना खोया और कितना पाया.

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2008 में बीजेपी को हुआ नफा

साल 2003 के दिल्ली चुनाव में 48.1 फीसदी वोट शेयर के साथ 47 सीटें जीत सरकार बनाने वाली कांग्रेस 2008 में भी सत्ता बचाने में सफल रही थी. हालांकि, पार्टी को वोट शेयर और सीटों के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ा था. कांग्रेस 2008 में 40.3 फीसदी वोट शेयर के साथ 43 सीटें जीत लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी.

कांग्रेस को तब जहां करीब आठ फीसदी वोटों का नुकसान उठाना पड़ा, वहीं विपक्षी बीजेपी को मामूली लाभ हुआ. बीजेपी का वोट शेयर पिछले चुनाव के 35.2 से बढ़कर 36.3 और सीटें 20 से बढ़कर 23 हो गईं. 2008 में 14 फीसदी वोट शेयर के साथ बसपा भी दो सीटें जीतने में सफल रही थी. रामविलास पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी 1.3 फीसदी वोट शेयर के साथ एक सीट जीती थी.

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2013 में हुआ AAP का उभार

साल 2013 के दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. अपने पहले ही चुनाव में आम आदमी पार्टी को 29.70 फीसदी वोट के साथ 28 सीटों पर जीत मिली. 2008 में 40 फीसदी से अधिक वोट शेयर के साथ 43 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 24.70 फीसदी वोट के साथ आठ सीटों पर सिमट गई. बीजेपी का वोट शेयर 36.3 फीसदी से गिरकर 33.3 फीसदी पर आ गया लेकिन पार्टी 31 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी.

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इस चुनाव में बसपा 14 से 5.4 फीसदी वोट शेयर पर आ गई. इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था और नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन दे दिया था. 2013 में कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मु्ख्यमंत्री बने थे. हालांकि, दो विरोधी दलों की गठबंधन सरकार 49 दिन ही चल सकी थी.

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2015 और 2020 में शून्य पर सिमट गई कांग्रेस

साल 2015 के दिल्ली चुनाव में झाड़ू ऐसी चली कि कांग्रेस शून्य पर सिमट गई और बीजेपी भी तीन सीटें ही जीत सकी. आम आदमी पार्टी 54.5 फीसदी वोट शेयर के साथ 67 सीटें जीत प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई और बीजेपी 32.3 फीसदी वोट शेयर के बावजूद तीन सीटों पर ही सिमट गई. कांग्रेस का वोट शेयर 10 फीसदी से भी कम 9.7 फीसदी रहा और पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी. 2020 के दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर और सीटें, दोनों ही कम हुए.

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आम आदमी पार्टी 53.8 फीसदी वोट शेयर के साथ 62 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी करने में सफल रही. बीजेपी के वोट शेयर में करीब छह फीसदी का इजाफा हुआ और पार्टी 38.7 फीसदी वोट शेयर के साथ आठ सीटें जीतने में सफल रही. कांग्रेस इस बार भी दिल्ली विधानसभा में खाता नहीं खोल सकी और पार्टी के वोट शेयर में गिरावट का ट्रेंड भी जारी रहा. कांग्रेस को 4.3 फीसदी वोट मिले थे.

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