महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद एक मंच पर आ रहे हैं. दोनों भाइयों को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए 'एक है तो सेफ है' में ही रास्ता दिख रहा है. 5 जुलाई को उनकी संयुक्त रैली से महाराष्ट्र की राजनीति में नई संभावनाओं के कयास लगाए जा रहे हैं.