कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) चुनाव में नामांकन वापसी के आखिरी दिन बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला. ठाकरे गुट, मनसे, कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के उम्मीदवारों की ओर से नामांकन वापस लिए जाने से सत्ताधारी महायुति को बड़ा फायदा हुआ है. आज की स्थिति के अनुसार भारतीय जनता पार्टी के 14 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 6 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं. यानी चुनाव से पहले ही महायुति के कुल 20 पार्षद निर्विरोध चुन लिए गए हैं. इसके बाद महायुति की ओर से दावा किया जा रहा है कि KDMC में अगला महापौर भी महायुति का ही होगा.
किन दलों के कितने उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया
अब तक मिली जानकारी के अनुसार-
मनसे: 5 उम्मीदवार
शिवसेना (ठाकरे गुट): 6 उम्मीदवार
कांग्रेस: 3 उम्मीदवार
दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस: 5 उम्मीदवार
RPI: 1 उम्मीदवार
वंचित बहुजन आघाड़ी: 1 उम्मीदवार
इसके चलते कई प्रभागों में बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं.
'ठाकरे ब्रांड' पर सवाल
चुनाव से पहले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने से ‘ठाकरे ब्रांड’ का जोरदार प्रचार हुआ था. लेकिन KDMC चुनाव में ठाकरे गुट और मनसे के उम्मीदवारों की ओर से बड़ी संख्या में नामांकन वापस लेने से यह ब्रांड कल्याण-डोंबिवली में कमजोर पड़ता दिख रहा है. यह चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है. यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या ठाकरे ब्रांड के ही कार्यकर्ताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से महायुति को फायदा पहुंचाया.
मनसे नेतृत्व पर भी प्रश्नचिन्ह
मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल का पूरा ध्यान केडीएमसी चुनाव पर होने की बात कही जा रही थी, लेकिन पार्टी के पांच उम्मीदवारों की हार के बाद स्थानीय नेतृत्व पर सवाल खड़े हो गए हैं. मनसे के शहराध्यक्ष मनोज घरत, जिन पर डोंबिवली शहर के सभी उम्मीदवारों की जिम्मेदारी थी, ने बीजेपी उम्मीदवार महेश पाटिल के मुकाबले अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके चलते महेश पाटिल निर्विरोध निर्वाचित हो गए, जिससे मनसे की रणनीति और नेतृत्व दोनों पर सवाल उठने लगे हैं.
इसी तरह, शिवसेना (ठाकरे गुट) के उपजिला प्रमुख राहुल भगत के नामांकन वापस लेने से बीजेपी के मुकुंद पेडणेकर निर्विरोध चुने गए. खास बात यह रही कि नामांकन वापसी के कुछ ही घंटों बाद राहुल भगत ने बीजेपी जॉइन कर ली.
कांग्रेस-NCP की हार से महायुति को लाभ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ ठाकरे गुट और मनसे ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवारों की ओर से भी नामांकन वापस लेने से महायुति को अप्रत्यक्ष समर्थन मिला. निर्विरोध चुनावों की संख्या बढ़ने से स्थानीय नागरिकों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है. लोगों का कहना है कि अगर चुनाव ही नहीं कराना था, तो सभी को निर्विरोध ही चुन लेते.
क्या KDMC को नजरअंदाज कर रहे ठाकरे बंधु?
अब सवाल उठ रहा है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे चुनाव प्रचार के लिए कल्याण-डोंबिवली आएंगे या नहीं? सूत्रों के मुताबिक, ठाकरे बंधुओं का मुख्य फोकस मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर होने के कारण KDMC को नजरअंदाज किया जा रहा है.
बड़े दावों और जीत के नारों के साथ एकजुट हुए ठाकरे बंधु, KDMC में उम्मीदवारों को मैदान में टिकाए नहीं रख सके. ऐसे में आने वाले चुनावी चरणों में ठाकरे गुट और मनसे के कितने पार्षद वास्तव में जीत दर्ज कर पाएंगे, इस पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है.
शिवसेना (शिंदे गुट) के निर्विरोध उम्मीदवार
1- रमेश म्हात्रे
2- हर्षल राजेश मोरे
3- वृषाली रणजीत जोशी
4- विश्वनाथ राणे
5- ज्योती राजन मराठे
6- रेश्मा किरण निचल
भारतीय जनता पार्टी के निर्विरोध उम्मीदवार
1- रेखा राजन चौधरी
2- आसावरी नवरे
3- रंजना मितेश पेणकर
4- मंदा पाटिल
5- ज्योति पवन पाटिल
6- मुकुंद पेडणेकर
7- महेश बाबुराव पाटिल
8- साई शिवाजी शेलार
9- हर्षदा हृदयनाथ भोईर
10- जयेश म्हात्रे
11- दीपेश म्हात्रे
12- रवीना अमर माली
13- पूजा योगेश म्हात्रे
14- डॉ सुनीता पाटिल
अभिजीत करंडे