नवाब मलिक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 17 महीने बाद मिली जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवाब मलिक को जमानत दे दी है. उन्हें मेडिकल आधार पर दो महीने के लिए जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया गया है. ईडी ने भी मेडिकल आधार पर जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई. नवाब मलिक फरवरी 2022 में गिरफ्तार होने के बाद से जेल में हैं.

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महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक (फाइल फोटो) महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 3:57 PM IST

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मेडिकल आधार पर दो महीने के लिए जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है. वहीं प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी मेडिकल आधार पर जमानत देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई. नवाब मलिक फरवरी 2022 में  गिरफ्तार होने के बाद से जेल में हैं. वह 17 महीने बाद जेल से बाहर आएंगे.

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दरअसल, मलिक ने ईडी द्वारा जांच किए जा रहे मामले में मेडिकल आधार पर जमानत देने से इनकार करने के बंबई हाईकोर्ट के 13 जुलाई के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था. मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि मलिक किडनी की बीमारी और अन्य बीमारियों के कारण अस्पताल में हैं. हम मेडिकल शर्तों पर सख्ती से आदेश पारित कर रहे हैं."

बता दें कि ईडी ने कथित तौर पर भगोड़े डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की गतिविधियों से जुड़े मामले में मलिक को फरवरी 2022 में गिरफ्तार किया था. एनसीपी नेता न्यायिक हिरासत में हैं और वर्तमान में मुंबई के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.

मलिक ने हाईकोर्ट से राहत की मांग करते हुए दावा किया था कि वह कई अन्य बीमारियों के अलावा क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित है. उन्होंने योग्यता के आधार पर जमानत की भी मांग की. तब उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि वह दो सप्ताह के बाद योग्यता के आधार पर जमानत की मांग करने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करेगा.

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मलिक के खिलाफ ईडी का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा एक नामित वैश्विक आतंकवादी और 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों के मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज की गई एफआईआर पर आधारित है.

(पीटीआई के इनपुट के साथ)

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