हॉस्टल के खाने में कीड़े और इल्ली! शिकायत की तो कैंटीन ठेकेदार ने छात्रों को धमकाया

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कलमनुरी स्थित डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर पिछड़ा वर्ग छात्रावास में खराब और कीड़े-इल्ली युक्त भोजन मिलने का मामला सामने आया है. छात्रों का आरोप है कि शिकायत करने पर कैंटीन ठेकेदार ने उन्हें धमकाया. घटना के बाद अभिभावकों ने छात्रावास पहुंचकर हंगामा किया और भोजन व्यवस्था की जांच की मांग उठाई.  

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हॉस्टल के खाने में कीड़े और इल्ली  (Photo: itg) हॉस्टल के खाने में कीड़े और इल्ली (Photo: itg)

aajtak.in

  • हिंगोली,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:48 PM IST

महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कलमनुरी शहर में स्थित डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर पिछड़ा वर्ग छात्रावास से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है. छात्रावास में रहने वाले छात्रों को परोसे जा रहे भोजन में कीड़े और इल्ली निकलने की शिकायत ने प्रशासन और समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

छात्रों का आरोप है कि छात्रावास की कैंटीन में लंबे समय से बेहद घटिया क्वालिटी का खाना परोसा जा रहा है. हाल ही में जब छात्रों को परोसे गए खाने में कीड़े और इल्ली दिखाई दी, तो उन्होंने इसकी शिकायत सीधे कैंटीन ठेकेदार से की. लेकिन छात्रों का कहना है कि ठेकेदार ने शिकायत सुनने के बजाय उन्हें धमकाया और वही खाना खाने का दबाव बनाया.

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इस घटना की जानकारी जब छात्रों के परिजनों को मिली, तो वे बड़ी संख्या में छात्रावास पहुंचे और जमकर हंगामा किया. परिजनों ने छात्रावास प्रशासन और कैंटीन व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही.

छात्रों ने बताया कि पहले उन्हें सुबह के नाश्ते में अंडे और बिस्किट नियमित रूप से दिए जाते थे, लेकिन अब यह सुविधा भी कभी-कभार ही मिलती है. इसके अलावा सुबह पीने के लिए जो दूध उपलब्ध कराया जाता है, उसमें भी पानी मिलाए जाने का आरोप छात्रों ने लगाया है. छात्रों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है.

घटना सामने आने के बाद कुछ सामाजिक संगठनों और वंचित आघाड़ी ने भी छात्रावास पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. संगठनों का कहना है कि पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए बने छात्रावासों में इस तरह की लापरवाही बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. जब इस मामले को लेकर समाज कल्याण विभाग से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया.  

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 Input: ध्यानेश्वर किशनराव

 

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