'क्या मुख्यमंत्री इतने असहाय हैं?', मंत्री के फरार बेटे को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की सरकार को फटकार

अदालत ने यह तीखी टिप्पणी मंत्री के बेटे के फरार होने के मामले को लेकर की. विकास गोगावले पर रायगढ़ जिले के महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में शामिल होने का आरोप है. अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मंत्री भरत गोगावले अपने बेटे से बात करेंगे और उसे आत्मसमर्पण के लिए राजी करेंगे.

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बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जमदार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए (File Photo- PTI) बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जमदार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:01 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्या राज्य में कानून का राज वाकई कायम है और क्या मुख्यमंत्री इतने असहाय हैं कि वह एक मंत्री के खिलाफ भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं. अदालत ने यह तीखी टिप्पणी एक मंत्री के बेटे के फरार होने के मामले को लेकर की.

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न्यायमूर्ति माधव जमदार ने कहा, “क्या राज्य के मुख्यमंत्री इतने बेबस हैं कि वह एक मंत्री के खिलाफ भी कुछ नहीं कह सकते? मंत्रियों के बच्चे अपराध करते हैं और खुलेआम घूमते रहते हैं, लेकिन पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाती.” अदालत की यह टिप्पणी शिवसेना के मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई.

दरअसल, विकास गोगावले पर रायगढ़ जिले के महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प में शामिल होने का आरोप है. वह इस मामले में नामजद आरोपी है और गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे सेशंस कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. इसके बावजूद विकास गोगावले अब तक फरार है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जमदार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि क्या राज्य में कानून-व्यवस्था और कानून का शासन वास्तव में लागू है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में विफल रहती है तो अदालत को सख्त आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

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अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मंत्री भरत गोगावले अपने बेटे से बात करेंगे और उसे आत्मसमर्पण के लिए राजी करेंगे. राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि विकास गोगावले शुक्रवार तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देगा.

इस पर हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, “उसे कल की सुनवाई से पहले आत्मसमर्पण करने को कहिए.” न्यायमूर्ति जमदार ने यह भी कहा कि पुलिस पर दबाव हो सकता है, लेकिन अदालत पर कोई दबाव नहीं है.

गौरतलब है कि 2 दिसंबर को महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. दोनों दल फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में सहयोगी हैं और शिंदे व पवार दोनों उपमुख्यमंत्री हैं. इस झड़प के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं और क्रॉस एफआईआर दर्ज हुईं. 

एक एफआईआर में विकास गोगावले, उनके चचेरे भाई महेश गोगावले और उनके समर्थकों को आरोपी बनाया गया है. वहीं दूसरी एफआईआर में पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और एनसीपी नेता श्रीयांश जगताप का नाम है, जिन्हें हाईकोर्ट पहले ही अंतरिम गिरफ्तारी संरक्षण दे चुका है.

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