झारखंड को मिलेगी 2005 से खनिज रॉयल्टी की बकाया राशि, केंद्र देगा 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये, SC का फैसला

केंद्र सरकार पर झारखंड के बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जेएमएम ने स्वागत किया है. जेएमएम महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि लंबे संघर्ष के बाद आज ये दिन आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की जनता के हित में फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के प्रति वो आभार व्यक्त करते हैं. 

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सीएम हेमंत सोरेन ने SC के फैसले को बताया ऐतिहासिक सीएम हेमंत सोरेन ने SC के फैसले को बताया ऐतिहासिक

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 15 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 3:35 AM IST

राज्य सरकारें अब 1 अप्रैल 2005 के बाद से केंद्र और खनन कंपनियों से पिछला बकाया वसूल सकेंगे. खनिज अधिकारों पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों के पास ही रहेगा. सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और माइनिंग कंपनियों को बड़ा झटका लगा है. 9 जजों की संविधान पीठ ने खनिज अधिकारों और खनिज वाली भूमि पर टैक्स लगाने के मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है.

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केंद्र सरकार पर झारखंड के बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जेएमएम ने स्वागत किया है. जेएमएम महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि लंबे संघर्ष के बाद आज ये दिन आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की जनता के हित में फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के प्रति वो आभार व्यक्त करते हैं. 

'पीएम से लेकर गृह मंत्री तक लगाई थी फरियाद'

उन्होंने कहा, 'बकाया राशि को लेकर बार-बार केंद्र सरकार के पास गुहार लगाने के बावजूद भी उनके कानों में जूं तक नहीं रेंगा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य का हक अधिकार देने का काम किया है.' विनोद पांडेय ने कहा कि शुरू से ही केंद्र सरकार राज्य के हिस्से का बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये देने में आनाकानी कर रही थी. सीएम हेमंत सोरेन ने इस बकाया राशि को लेकर देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक से फरियाद लगाई थी. लेकिन कुछ भी नहीं हुआ. 

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उन्होंने कहा, 'अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ना सिर्फ झारखंड, बल्कि दूसरे खनन वाले राज्यों को भी फायदा होगा. अब राज्य खनन वाली कंपनियों पर टैक्स लगा पाएंगे. बकाया राशि के भुगतान से राज्य की विकास योजनाओं को गति मिलेगी. राज्य की हेमंत सोरेन सरकार प्रदेश की जनता के लिए और भी कई नई कल्याणकारी योजनाओं का शुभारंभ करने की ओर कदम बढ़ा पाएगी.'

कांग्रेस ने भी फैसले पर जताई खुशी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा झारखंड सरकार का केंद्र सरकार पर बकाया 1,36,000 करोड़ रुपये की राशि भुगतान के संबंध में दिए गए फैसले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग 20 वर्षों की लंबी लड़ाई के बाद आज झारखंड को उसका हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा 12 वर्षों की अवधि में बकाया राशि निर्गत करने का आदेश झारखंड वासियों के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा. इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि महागठबंधन सरकार द्वारा बार-बार केंद्र से मांगी जाने वाली राशि कोई अवांछित मांग नहीं थी बल्कि यह झारखंड की जनता का अधिकार था जिसे देश की न्यायिक व्यवस्था ने उचित मानते हुए झारखंड के हक में फैसला दिया. केंद्र सरकार द्वारा गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ किए जा रहे भेदभाव के खिलाफ यह फैसला एक नजीर की तरह साबित होगा. 

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'राज्यों को हक पाने के लिए जाना पड़ता है कोर्ट'

उन्होंने कहा, 'पिछले एक दशक से यह एक अजीब विडंबना है कि राज्यों को केंद्र से उनका हक पाने के लिए न्यायालय का सहारा लेना पड़ रहा है. गैर भाजपा शासित राज्यों को उनके हक से वंचित रखने की एक नई परंपरा मोदी सरकार के कार्यकाल में प्रारंभ हुई है जो देश के संवैधानिक तंत्र का मखौल उड़ाता है. आज साबित हो गया है कि देश के संविधान को परे रखकर कोई भी निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था में नहीं लिया जा सकता. आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में प्रावधानों की व्यवस्था की गई है जिसके कारण आज भी देश में लोकतांत्रिक मूल्य जीवित हैं.'

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