हेमंत सोरेन की कुर्सी पर खतरा! चुनाव आयोग की रिपोर्ट तैयार, जल्द राज्यपाल को भेजी जाएगी

चुनाव आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के राज्यपाल को भेजने के लिए रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. अंतिम तौर पर संशोधन और परिवर्द्धन चल रहा है. यानी रिपोर्ट सोमवार से शुरू होने वाले हफ्ते में कभी भी राज्यपाल को सौंप दी जाएगी. तमाम आशंकाओं के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा भी एहतियाती उपायों पर विचार कर रहा है.

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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की याचिका पर चुनाव आयोग ने सुनवाई की है. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की याचिका पर चुनाव आयोग ने सुनवाई की है.

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 11:47 PM IST

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुश्किलें फिलहाल कम नहीं हुई हैं. अवैध लीज माइनिंग मामले में उनकी विधायकी पर खंतरा मंडरा रहा है. चुनाव आयोग ने सोरेन को विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की याचिका पर सभी पक्षकारों की मौखिक और लिखित दलीलों का अध्ययन कर लिया है. सभी पक्षकारों ने 18 अगस्त की तय समय सीमा में अपने लिखित जवाब आयोग को दे दिए थे.

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चुनाव आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के राज्यपाल को भेजने के लिए रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है. अंतिम तौर पर संशोधन और परिवर्द्धन चल रहा है. यानी रिपोर्ट सोमवार से शुरू होने वाले हफ्ते में कभी भी राज्यपाल को सौंप दी जाएगी. सूत्र तो इस बात का संकेत दे रहे हैं कि कोई आश्चर्य नहीं है कि हेमंत सोरेन की सरकार गिर जाए. 

झामुमो बना रहा है फुल प्रूफ प्लान

यही वजह है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी एहतियाती उपायों पर विचार करना शुरू कर दिया है. अगर आशंकाएं सच साबित हुईं तो आगे सर्वसम्मति से किसका राजतिलक किया जाए, इसे लेकर भी फुल प्रूफ प्लान बनाया जा रहा है. इसमें झामुमो के वयोवृद्ध से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के नाम भी चर्चा में हैं. आयोग के सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट के खाका लगभग तैयार है.

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क्या है मामला
दरअसल, आरटीआई एक्टिविस्ट शिव शर्मा ने दो PIL दायर कर CBI और ED से एक माइनिंग घोटाले की जांच कराने की मांग की थी. यह मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े खनन लीज और शेल कंपनियों में उनके और उनके करीबियों की हिस्सेदारी से जुड़ा है. आरोप है कि सीएम हेमंत ने अपने पद का दुरुपयोग कर स्टोन क्यूएरी माइंस अपने नाम आवंटित करवा लीं. इस मामले की जांच सीबीआई और ED से करवाने की मांग गई थी, जबकि सोरेन परिवार पर शैल कंपनी में इन्वेस्ट कर अकूत संपत्ति अर्जित करने का मामला है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने भी सुनवाई की. दोनों ने जनप्रतिनिधि अधिनियम-1951 की धारा 9A के तहत लाभ का पद से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर सुनवाई की थी. अब ये सुनवाई पूरी हो चुकी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है. 

अनगड़ा खदान के पट्टे के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से चुनाव आयोग ने जवाब तलब किया था. सोरेन ने जवाब में कहा था- रांची के अनगड़ा प्रखंड में 88 डेसमिल पत्थर खदान खनन की लीज 14 साल पहले 17 मई 2008 को दस साल के लिए दी गई थी. 2018 में इसके नवीकरण के अनुरोध को नामंजूर कर दिया गया था. फिर 2021 में उनकी लीज रिन्यू कर दी गई थी. लेकिन, प्रशासन से जब कई नीतिगत कारणों से इस साल चार फरवरी तक खनन करने की अनुमति (सीओटी) नहीं मिली तो उन्होंने बगैर खनन किए लीज सरेंडर कर दी. अब फिलहाल उनके पास कोई माइनिंग की जमीन लीज पर नहीं है.

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