झारखंड में हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के प्लस टू विद्यालय परिसर में एक ऐसा भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं. यहां एक पिता अपने घायल बेटे को कंधे पर उठाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचा, ताकि उसका भविष्य किसी दुर्घटना की भेंट न चढ़े.
यह प्रेरणादायक घटना बेलतू गांव निवासी रामवृक्ष साव और उनके बेटे ओम प्रकाश कुमार से जुड़ी है. दरअसल, ओम प्रकाश मैट्रिक की परीक्षा दे रहा है. शनिवार को परीक्षा देकर घर लौटते समय एक तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से उसका बायां पैर गंभीर रूप से टूट गया.
परिवार में चिंता और असमंजस का माहौल था, लेकिन पिता रामवृक्ष साव ने ठान लिया कि बेटे की पढ़ाई और परीक्षा किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने देंगे. सोमवार को विज्ञान विषय की परीक्षा थी. बेटा चलने की हालत में नहीं था, ऐसे में रामवृक्ष साव ने उसे कंधे पर उठाया और करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया.
रास्ते भर उन्होंने बिना थके बेटे को संभालते हुए सफर पूरा किया, मानो अपने कंधों पर सिर्फ बेटे को नहीं, बल्कि उसके सपनों को भी उठाए हुए हों. परीक्षा केंद्र पर मौजूद शिक्षक, छात्र और अभिभावक इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे. सभी ने पिता के त्याग, धैर्य और जज्बे की सराहना की.
लोगों ने कहा कि यह केवल एक पिता का कर्तव्य नहीं, बल्कि अपने बच्चे के भविष्य के लिए किया गया असाधारण संघर्ष है. रामवृक्ष साव की यह कहानी पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है. यह घटना साबित करती है कि सच्चा प्रेम, बलिदान और हौसला कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सपनों को टूटने नहीं देता.
Input: बिस्मय अलंकार
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