शुजात बुखारी के बेटे का भावुक लेख, 'इस निर्दयी दुनिया में फिट नहीं थे पापा'

शुजात बुखारी के बेटे तमहीद ने गुरुवार को उनके ही अखबार राइज़िंग कश्मीर में अपने पिता की मौत को लेकर एक आर्टिकल लिखा है. 10वीं क्लास में पढ़ने वाले तमहीद ने लिखा है कि मेरे पिता सिद्धांतों पर चलने वाले व्यक्ति थे.

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शुजात बुखारी के बेटे ने लिखा भावुक खत शुजात बुखारी के बेटे ने लिखा भावुक खत

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2018,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

जम्मू-कश्मीर में रमजान के मौके पर लागू किए गए सीजफायर के आखिरी दिन आतंकियों द्वारा पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई थी. पत्रकार की हत्या के बाद घाटी में एक बार फिर बिगड़ते हालातों का माहौल उभर कर आया. जिसके बाद राज्य सरकार में शामिल बीजेपी-पीडीपी का संबंध टूटा और सरकार टूट गई.

शुजात बुखारी के बेटे तमहीद ने गुरुवार को उनके ही अखबार राइज़िंग कश्मीर में अपने पिता की मौत को लेकर एक आर्टिकल लिखा है. 10वीं क्लास में पढ़ने वाले तमहीद ने लिखा है कि मेरे पिता सिद्धांतों पर चलने वाले व्यक्ति थे. आपको बता दें कि शुजात बुखारी का बेटा तमहीद कश्मीर वैली स्कूल में दसवीं क्लास में पढ़ता है.

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आर्टिकल में तमहीद ने लिखा है कि 14 जून का दिन मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी डरावना दिन था, जब मैं पीसीआर से श्रीनगर पहुंचा तो मैंने किसी के मुंह से सुना कि वो नहीं रहे. ये सुनते ही मेरे पैर कांपने लगे और मेरे दिमाग में कई तरह के ख्यालात आने लगे.

मैं सोच रहा था कि क्या पता अभी भी वह ऑपरेशन थियेटर में हो? क्या पता वो अभी भी जिंदा हों? मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था कि कोई मेरे पिता के साथ क्यों इस तरह करेगा? जैसे ही पिता का शव आया तो वहां पर काफी भीड़ एकत्रित होने लगी.

तमहीद ने लिखा कि मेरे पिता हमेशा से ही अपने सिद्धातों पर चलते थे, उनके चारों ओर उनसे नफरत करने वाले हजारों लोग थे लेकिन फिर भी उन्होंने उनके खिलाफ कोई शब्द नहीं कहा. मेरे पिता किसी का बुरा नहीं सोचते थे, बल्कि वह अपने ऑफिस के स्टाफ को भी परिवार का हिस्सा मानते थे. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी घाटी में शांति के लिए काम किया था. वह कश्मीरी भाषा को आगे ले जाना चाहते थे.

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शुजात बुखारी के बेटे ने लिखा कि 1990 में आतंकियों और सेना के बीच मुठभेड़ के दौरान पिता के दो कजिन की मौत हो थी. हमारे परिवार में कश्मीर मुद्दे के कारण ये तीसरी मौत है.

बेटे ने लिखा कि इस निर्दयी दुनिया के लिए मेरे पिता फिट नहीं थे. भगवान को उनके जैसी पवित्र आत्मा की ऊपर जरूरत थी, इसलिए उन्हें अपने पास बुला लिया.

बीते 14 जून को आतंकियों ने शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या कर दी. आतंकी शुजात बुखारी को मारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते थे और इसीलिए उन पर ताबड़तोड़ 15 गोलियां दागी गई थीं. तीन बाइक सवार आतंकियों ने शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी.

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस के मुताबिक, गुरुवार की शाम वह श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में स्थित अपने ऑफिस से एक इफ्तार पार्टी में शरीक होने के लिए निकले थे. तभी उन पर यह जानलेवा हमला हुआ. हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हो गई थी.

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