BJP-PDP के 'तलाक' पर उमर अब्दुल्ला का तंज, ट्वीट किया विवादित फिल्म का सीन

इस वीडियो को शेयर करते हुए उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि पीडीपी और बीजेपी अपनी राजनीतिक रणनीति को बनाने के लिए बॉलीवुड फिल्मों को देख रही थी. उन्होंने अपना तलाक कुछ इसी तरह तैयार किया.

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J-K के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला J-K के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2018,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अचानक आए उफान ने हर किसी को चौंका दिया. बीजेपी ने मंगलवार को पीडीपी से अपना समर्थन वापस लिया और देर शाम तक राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. गुरुवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीडीपी-बीजेपी के गठबंधन पर तंज सकते हुए एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में फिल्म के सीन का कुछ हिस्सा है, जिसमें दो किरदार आपस में नकली लड़ाई करने की बात करते हैं.

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इस वीडियो को शेयर करते हुए उमर अब्दुल्ला ने लिखा कि पीडीपी और बीजेपी अपनी राजनीतिक रणनीति को बनाने के लिए बॉलीवुड फिल्मों को देख रही थी. उन्होंने अपना तलाक कुछ इसी तरह तैयार किया. एक शानदार फिक्स स्क्रिप्ट तैयार की गई. लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि जनता और हमलोग बेवकूफ नहीं हैं जो उनके नाटक को समझ पाएं.

क्या है इस सीन में?

इस सीन में दो किरदार आपस में बात कर रहे हैं कि तुम्हारी प्रजा तुमसे नाराज है और हमारी प्रजा हमसे नाराज है. इसका एक ही निष्कर्ष है हमारे बीच 15 दिन की एक लड़ाई हो जाए तुम हमारे खिलाफ जहर उगलना और हम तुम्हारे खिलाफ जहर उगलेंगे. तुम और हम देशभक्ति का भाषण देंगे, देशभक्ति का ये नशा 5 साल चलेगा. और उसके बाद फिर कोई और टूर्नामेंट खेलेंगे.

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किस फिल्म का है सीन, क्यों रहा था विवाद में?

आपको बता दें कि उमर अब्दुल्ला ने जिस फिल्म के सीन को ट्वीट किया है. वह 1977 में आई फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' है. ये फिल्म काफी विवादों में रही थी. दरअसल, इमरजेंसी के दौर में इस फिल्म को उस समय के राजनीतिक हालातों पर एक तंज के तौर पर पेश किया गया था, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी पर सीधे तौर पर कटाक्ष थे. इसी विवाद के कारण ये फिल्म तब रिलीज़ भी नहीं हो पाई थी.

इस फिल्म का निर्माण जनता पार्टी की तरफ से सांसद रहे अमृत नाहता ने किया था. इमरजेंसी के बाद में जब जनता पार्टी की सरकार आई तो शाह कमीशन बनाया गया, जिसकी जांच में संजय गांधी और तत्कालीन I&B मंत्री को इसके राइट्स को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया गया था.

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