देश के सबसे कुख्यात आपराधिक गिरोहों में से एक लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों ने बड़ी सफलता हासिल की है. गैंग के प्रमुख सदस्य और 'इंटरपोल रेड नोटिस' के सामना कर रहे अमन भैंसवाल को अमेरिका से डिपोर्ट कर बुधवार को भारत वापस लाया गया. दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरते ही हरियाणा पुलिस की एक विशेष टीम ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अमन भैंसवाल को भारत लाने का ऑपरेशन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के समन्वय में चलाया गया. सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा पुलिस के अनुरोध पर आरोपी के खिलाफ इंटरपोल से 'रेड नोटिस' जारी कराया गया था. सुरक्षा एजेंसियों ने तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसे अमेरिका में ट्रैक किया और वहां की एजेंसियों के साथ मिलकर उसकी गिरफ्तारी और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी की.
कौन है अमन भैंसवाल और क्या हैं आरोप?
अमन भैंसवाल लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ सिंडिकेट का एक सक्रिय और खतरनाक सदस्य माना जाता है. हरियाणा पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर हत्या, दंगा फैलाने और आपराधिक साजिश रचने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं.
आरोपी को पहले भारत में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया. जमानत मिलने के बाद उसने ट्रायल का सामना नहीं किया और फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश भागने में सफल रहा.
गैंगस्टर नेटवर्क पर कसता शिकंजा
अमन भैंसवाल की भारत वापसी को बिश्नोई गैंग के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 7 जनवरी 2026 को दिल्ली एयरपोर्ट पर उसकी गिरफ्तारी के बाद अब उसे सोनीपत (हरियाणा) ले जाया जाएगा, जहां पुलिस उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लेगी. पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान भैंसवाल से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के विदेशी फंडिंग, हथियारों की तस्करी और अमेरिका व कनाडा में छिपे अन्य गुर्गों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.
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