गुजरात के शिक्षा मॉडल पर सवाल खड़े करने वालों को जवाब देते हुए शिक्षामंत्री जीतू वघानी ने कहा है कि जिसे यहां की शिक्षा अच्छी नहीं लगती, वे गुजरात छोड़कर जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि पैदा गुजरात में हुए, रहना गुजरात में है और व्यापार भी गुजरात में ही किया. बच्चों को भी यहीं पढ़ाया और अब दूसरा राज्य अच्छा लगता हो तो मेरी विनती है कि जिसे जो भी दूसरा राज्य अच्छा लगता है वे वहां जा सकते हैं.
गुजरात के शिक्षा मंत्री ने ये बयान बुधवार को राजकोट में 3.40 करोड़ रुपये की लागत से बने संत तुलसीदास प्राथमिक शाला के नवनिर्मित बिल्डिंग के उद्घाटन के दौरान दिया. कार्यक्रम में शिक्षामंत्री स्कूल में पढ़ाई करने वाले बच्चों के अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे.
मनीष सिसोदिया के ट्वीट का दिया जवाब
जीतू वघानी का ये बयान मनीष सिसोदिया के उस ट्वीट को लेकर था जिसमें उन्होंने गुजरात के शिक्षा विभाग के जरिए चल रहे स्कूल में सुविधा और शिक्षकों कमी को लेकर गुजरात सरकार पर निशाना साधा था.
उधर, जीतू वघानी के इस बयान को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. आम आदमी पार्टी के गुजरात के अध्यक्ष गोपाल इटालिया का कहना है कि शिक्षामंत्री के इस बयान से ये साफ होता है कि पिछले 27 साल से गुजरात सरकार अच्छी शिक्षा देने में विफल रही है.
बता दें कि शिक्षा और शिक्षकों के मुद्दे को लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने पहले ही गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग को न्योता दे चुकी है. वहीं, जीतू वघानी के इस बयान के बाद बीजेपी के नेता डॉक्टर परिमल त्रिवेदी ने कहा है कि ये एक व्यंग्यपूर्ण बयान था, जिसका मतलब गलत निकाला जा रहा है.
दरअसल, सबसे पहले बीजेपी गुजरात ट्विटर हैंडल ने अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे. ट्वीट में कहा गया कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था फेल हो गई है और केजरीवाल शिक्षा मॉडल फेल हो गया है. इसके बाद आम आदमी पार्टी ने जवाब दिया. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि वे गुजरात सरकार के अधिकारियों, गुजरात सरकार के मंत्रियों और मुख्य रूप से शिक्षा मंत्री जीतू वघानी का दिल्ली में स्वागत करेंगे. वे यहां आएं और स्कूलों का निरीक्षण करें.
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