गुजरात में मकर संक्रांति यानी उत्तरायण का पर्व इस बार कई परिवारों के लिए खुशी के साथ चिंता और दुख भी लेकर आया. 14 जनवरी 2026 को राज्य भर में इमरजेंसी मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई. आम दिनों की तुलना में 108 इमरजेंसी सर्विस को 33.33 प्रतिशत ज्यादा कॉल मिलीं. इस दिन कुल 5 हजार 897 आपातकालीन चिकित्सा मामले दर्ज किए गए, जो सामान्य दिनों से कहीं अधिक हैं.
त्योहार के दौरान पतंग उड़ाने, छतों पर भीड़ जमा होने और लोगों की आवाजाही बढ़ने से गैर-वाहन दुर्घटनाओं में भी तेज उछाल देखा गया. सामान्य दिनों में जहां ऐसे मामलों की संख्या औसतन 484 रहती है, वहीं उत्तरायण के दिन यह बढ़कर 1 हजार 313 तक पहुंच गई, यानी 171 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
पतंग की डोर बनी सबसे बड़ा खतरा
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े पतंग की डोर से कटने या घायल होने के मामलों के रहे. इन मामलों में 200 से लेकर 1 हजार प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. कुल मिलाकर राज्य भर में पतंग की डोर से घायल होने के 182 मामले सामने आए. यह साफ दिखाता है कि तीखी और खतरनाक डोर लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गई.
इसके अलावा छत या ऊंचाई से गिरने के मामलों में भी भारी संख्या दर्ज की गई. राज्य में कुल 488 लोग छत से गिरने या फिसलने की घटनाओं में घायल हुए. इन मामलों में 92.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण छतों पर पतंग उड़ाना बताया गया.
झगड़े, हमले और बिजली से जुड़े हादसे
उत्तरायण के दौरान भीड़भाड़ और आपसी विवादों के कारण शारीरिक हमले के मामलों में भी 284.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. यह आंकड़ा दर्शाता है कि उत्सव के माहौल में तनाव और झगड़े भी बढ़े. इसके साथ ही बिजली के तारों के पास पतंग उड़ाने के कारण करंट लगने और जलने की घटनाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो अहमदाबाद में सबसे ज्यादा 1 हजार 176 मामले दर्ज किए गए. सूरत में 567, राजकोट में 365 और वडोदरा में 363 मामले सामने आए. वहीं तापी, बनासकांठा, जूनागढ़ और डांग जैसे कुछ जिलों में मामलों में मामूली कमी भी देखी गई.
108 ईएमएस की त्वरित तैयारी और राहत
गुजरात के सबसे प्रिय त्योहारों में से एक उत्तरायण को देखते हुए 108 आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं ने पहले से ही खास तैयारी की थी. उन्नत पूर्वानुमान, रणनीतिक तैनाती और चौबीसों घंटे निगरानी के जरिए 2026 के उत्तरायण के दौरान निर्बाध आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित की गई.
तेजी से बढ़े मामलों के बावजूद 108 ईएमएस की समय पर प्रतिक्रिया और त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप से अधिकांश मामलों में गंभीर परिणामों को रोका जा सका. अधिकारियों का कहना है कि इन आंकड़ों से यह साफ है कि त्योहार के दौरान सुरक्षा को लेकर और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है.
ब्रिजेश दोशी