गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित प्रसिद्ध अंबाजी मंदिर में पारंपरिक प्रसाद की जगह चिक्की चढ़ाने के मामले को राज्य सरकार ने सुलझा दिया है. राज्य सरकार का कहना है कि अब से चढ़ावे के लिए पारंपरिक प्रसाद मोहनथाल और चिक्की दोनों प्रसादों को एक साथ रखा जाएगा.
सरकार का कहना है कि मोहनथाल की क्वालिटी को पहले से बेहतर किया जाएगा. इस संबंध में ट्रस्ट से दोनों प्रसादों को एक साथ रखने को कहा गया है.
बता दें कि अंबाजी मंदिर में मोहनथाल प्रसाद को बंद कर दिया गया था और उसकी जगह चिक्की शुरू की गई थी, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था. लेकिन अब दोनों ही प्रसाद को एक साथ रखा जाएगा.
इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी शुरू से ही बीजेपी सरकार पर निशाना साधती रही है. इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने रविवार को मंदिर में मिठाई 'मोहनथाल' को प्रसाद के रूप में चढ़ाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थक पैसा कमाने की वजह से मंदिर की परंपरा से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं.
क्या है कांग्रेस का आरोप
ठाकोर ने दावा किया था कि अनादि काल से ही 'मोहनथाल' (बेसन, घी और चीनी से बनी मिठाई) अंबाजी मंदिर का एक पारंपरिक प्रसाद रहा है. उन्होंने कहा था कि अगर 'मोहनथाल' को फिर से प्रसाद के रूप में वापस नहीं लाया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा.
'मोहनथाल' के बदले 'चिक्की' (मूंगफली और गुड़ से बनी मिठाई) को प्रसाद के रूप में चढ़ाने का सरकार ने बचाव किया था. गुजरात के मंत्री और सरकार के प्रवक्ता ऋषिकेश पटेल ने कहा था कि 'चिक्की' लंबी शेल्फ लाइफ के साथ आती है और इसे बाहर रहने वाले भक्तों द्वारा ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है.
भाजपा पर आरोप
अंबाजी मंदिर के प्रसाद के मुद्दे पर चर्चा की मांग करने और सदन में विरोध करने को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस विधायकों को गुजरात विधानसभा से निष्कासित कर दिया गया था. मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेता जगदीश ठाकोर ने कहा था, 'अंबाजी मंदिर में वर्षों से 'मोहनथाल' को प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा रही है. लेकिन परंपरा की कीमत पर, पैसा बनाने के लिए भाजपा समर्थकों द्वारा इसे 'चिक्की' से बदल दिया गया है.'
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