केंद्रीय बजट ने हीरा उद्योग को नई उम्मीद दे दी है. अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लैब में विकसित हीरों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार के कदम की घोषणा की. लैब में विकसित हीरे के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बीजों पर सीमा शुल्क कम करने का ऐलान किया गया है. सरकार के इस कदम से हीरा उद्यमी लैब ग्रोन डायमंड की चमक को बढ़ाने की कोशिश बता रहे हैं.
उद्यमियों की मानें तो यह लैब ग्रोन डायमंड माइंस से निकले हीरे के जैसा ही है. दोनों तरह के हीरों में मैटेरियल से लेकर चमक तक में कोई फर्क नहीं होता है, जबकि दोनों की कीमतों में काफी बड़ा अंतर होता है. एक तरफ जहां नेचुरल हीरा एक लाख की कीमत का होता है, वहीं उतने ही कैरेट का लैब ग्रोन डायमंड 15 हजार में मिल जाएगा.
देश और दुनिया में सूरत का हीरा कारोबार अपनी मजबूत पकड़ रखता है. दुनियाभर के हीरा बाजार में बिकने के लिए पहुंचने वाले 11 में से 9 हीरे सूरत के हीरा बाजाश में तराशे जाते हैं, जबकि कच्चे हीरे के लिए यहां के व्यापारियों को अफ्रीका और यूरोप पर डिपेंड रहना पड़ता था. लेकिन पिछले कुछ समय से सूरत के हीरा कारोबारियों ने लैब ग्रोन डायमंड की तरफ रुख किया है, जिसका असर अब दिखने लगा है.
हीरा कारीगरों के लिए नहीं होगी काम की कमी
सूरत में ग्रीन लैब के नाम से डायमंड का कारोबार करने वाले मुकेश पटेल और जितेश पटेल ने बताया कि सरकार ने भी हीरा कारोबारियों को नई दिशा देने के लिए कदम उठाया है. लैब ग्रोन डायमंड से न सिर्फ कारोबार को फायदा होगा, बल्कि हीरा तराशने वाले कारीगरों के लिए भी यह रोजगार की कमी नहीं होने देगा, क्योंकि दोनों तरह के हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग एक जैसी ही है. केंद्र सरकार के इस बजट को लेकर हीरा कारोबारी खुश हैं.
शत-प्रतिशत असली हैं लैबग्रोन डायमंड
ग्रीन लैब के नाम से लैबग्रोन हीरे का उत्पादन करने वाले मुकेश पटेल ने बताया कि यह प्रक्रिया भी टेस्ट ट्यूब बेबी और नेचुरली बोर्न बेबी के समान है. यहां हीरे विकसित करने की प्रक्रिया अलग होती है, लेकिन एन्ड रिजल्ट एकदम समान है. लैब ग्रोन डायमंड्स शत-प्रतिशत असली हैं और इन्हें कटिंग-एज तकनीक से लैब में बनाया जाता है. केमिकली और फिजिकली ये नेचुरल डायमंड के समान हैं.
उन्होंने बताया कि खनन किए गए हीरे कई वर्षों में प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की सतह के नीचे बनते हैं, जबकि लैब ग्रोन डायमंड को दो प्रक्रिया के माध्यम से केवल कुछ हफ्तों में प्रयोगशाला में बनाया जाता है. इसे हाई प्रेशर-हाई टेम्प्रेचर या केमिकल वेपर डिपोजिशन तकनीक कहते हैं. इसमें लावा की तरह सीड्स को पकाने के लिए मशीन का टेम्प्रेचर तकरीबन 1500 डिग्री सेल्सियस तक ले जाया जाता है.
सबसे अच्छी बात है कि लोगों के बीच लैब ग्रोन डायमंड के बारे में जागरुकता बढ़ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में भी हर साल लगभग 30 लाख लैब ग्रोन डायमंड्स बनाए जा रहे हैं और कारोबार में लगातार इजाफा हो रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ये मैन-मेड डायमंड, प्राकृतिक डायमंड्स की तुलना में इको-फ्रेंडली होते हैं.
नेचुरल डायमंड की तुलना में हैं सस्ता है लैबग्रोन
लैबग्रोन डायमंड को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है. बहुत से लोग इनके सिंथेटिक होने के कारण इन्हें फेक या नकली भी कहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. कई बड़े डायमंड ब्रांड्स और कंपनियां अब लैब ग्रोन डायमंड्स में इन्वेस्ट कर रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है इन डायमंड्स का इको-फ्रेंडली और सस्ता होना.
मुकेश पटेल ने बताया कि लैबग्रोन डायमंड सस्ता होने का मतलब यह नहीं है कि इन डायमंड्स की क्वालिटी में कोई कमी है, बल्कि ये सस्ते इसलिए हैं, क्योंकि इन्हें बनाने की प्रकिया, प्राकृतिक डायमंड्स की प्रक्रिया से कम समय लेने वाली है. इसमें कम लोग इन्वॉल्व होते हैं.
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक डायमंड्स को बनने में सालों लगते हैं और फिर इन्हें खनन करके निकाला जाता है, फिर तराशकर साफ करके इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन लैब में यह प्रक्रिया थोड़ी छोटी हो जाती है. इसलिए LGD की कीमत नेचुरल डायमंड से 80 से 85 प्रतिशत तक कम होती है.
पर्यावरण के लिए हैं बेहतर विकल्प
लैबग्रोन डायमंड्स को चुनने की सबसे बड़ी वजह है कि ये पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं हैं. इन्हें बनाने के लिए कोई खुदाई नहीं करनी पड़ती है और इस कारण धरती और पानी का विशाल द्रव्यमान नष्ट नहीं होता है. इसके आलावा भारी मात्रा में खुदाई से जुड़ा हुआ खर्चा भी बच जाता है.
डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉलिश किए गए नेचुरल डायमंड के प्रति एक कैरेट ग्रीनहाउस गैस फुटप्रिंट 160 किग्रा है. वहीं, सूरत की एक प्रमुख लैब ग्रोन डायमंड बनाने वाली कंपनी ग्रीन लैब डायमंड के अनुसार, विकसित और पॉलिश किए गए लैबग्रोन डायमंड में प्रति कैरेट केवल 8.17 किलोग्राम CO2e का कार्बन फुटप्रिंट है.
उद्योग को मिलेगा सरकार का बूस्टर डोज
लैबग्रोन डायमंड के कारोबारी मुकेश पटेल का कहना है कि केंद्र सरकार के बजट में हीरा उद्योग को लेकर खासतौर पर लैबग्रोन डायमंड में सीड्स और ड्यूटी माफी व लैबग्रोन डायमंड को नेचुरल हीरा के समक्ष बताने की बात को लेकर कारोबारी खुश हैं. अब उन्हें ड्यूटी माफी की स्पष्टता का इंतजार है. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार का यह सकारात्मक रुख इस उद्योग को बूस्टर डोज देगा. लैब डायमंड से सूरत में ज्वेलरी भी बनाकर देश और दुनिया में बेची जा रही है.
संजय सिंह राठौर