गुजरात में केवड़िया बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वैसे तो देश का एक बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन है लेकिन इस इलाके में एक मुद्दा काफी गरमाया हुआ है जिसकी वजह से गुजरात के आदिवासी लोगों में काफी नाराजगी है. दरअसल, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के डेप्युटी कलेक्टर नीलेश दुबे और सीआईएसएफ अधिकारी से एक कर्मचारी के मामले में कथित रूप से बातचीत का ऑडियो इलाके में वायरल हो गया है. इस ऑडियो में दावा किया जा रहा है कि नीलेश दुबे स्थानीय आदिवासियों के बारे में कुछ अपमानजनक बातें कह रहे हैं. ऑडियो वायरल होने के बाद इलाके में काफी हड़कंप मच गया है. नाराज आदिवासी समाज ने एक दिन केवड़िया बंद का ऐलान भी किया. इस पर स्थानीय व्यापारियों से लेकर सभी ने आदिवासी समाज का समर्थन किया है.
आदिवासियों के बारे में कही अपमानजनक बातें
वहीं ऑडियो को लेकर नीलेश दुबे ने सोशल मीडिया पर सफाई दी है. उनका कहना है कि ऑडियो क्लिप 'अर्धसत्य' है. दरअसल ऑडियो में एक शख्स कह रहा है कि यह जो आदिवासी लोग हैं पहले इनको खाना पीना नहीं मिलता था, चड्डी पहनते थे, जड़ी बूटी खाकर जीते थे और इनके अंदर तहजीब नहीं है. अब इस ऑडियो की क्या सच्चाई ये जांच के बाद ही पता चला पाएगा.
गुजरात में 27 विधानसभा सीटों पर आदिवासी समाज का वर्चस्व
बता दें कि गुजरात में इस साल विधानसभा के चुनाव हैं और गुजरात के अंदर 182 सीट में से 27 विधानसभा सीटों के ऊपर आदिवासी समाज का वर्चस्व है. ऐसे में कांग्रेस-बीजेपी नेता इस मामले में कूद पड़े हैं. दोनों ही पार्टियां नीलेश दुबे के खिलाफ पुलिस थाने में केस दर्ज करने की मांग कर रही हैं. खास बात ये है कि इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के नेताओं ने साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन भी किया. गुजरात के पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक गणपत वसावा ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र भी लिखा है कि मामले की संज्ञान लिया जाए. इसपर सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए दुबे को सस्पेंड कर उनका ट्रांसफर कर दिया जाए.
'न्याय नहीं हुआ तो रोड पर उतरेंगे'
वहीं आदिवासी समाज में भी इस ऑडियो को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है. केवड़िया बचाव आंदोलन समिति और आदिवासी समाज के लोगों ने मांग की है कि नीलेश दुबे के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए. गुजरात प्रदेश कांग्रेस के मंत्री हरेश वसावा का आरोप है गुजरात सरकार के दबाव में एफआईआर नहीं हो रही है. आदिवासी नेता डॉ. प्रफुल वसावा का कहना है कि अगर हमें न्याय नहीं मिला तो हम रोड पर आकर प्रदर्शन करेंगे.कानून का उल्लंघन हो रहा है जिसके लिये पुलिस ओर प्रशासन की जवाबदेही है.
इनपुट- नरेंद्र पेपरवाला
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