फिनलैंड में टीचरों की ट्रेनिंग, मोहल्ला क्लीनिक...जानिए किन मुद्दों पर आमने सामने आए एलजी और दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच 2015 से विवाद चला आ रहा है. यह विवाद पिछले साल मई में उप राज्यपाल विनय सक्सेना की तैनाती के बाद और बढ़ गया था. कई मुद्दों पर स्थिति टकराव पर भी पहुंच गई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अब दिल्ली की सरकार और उप राज्यपाल दफ्तर के बीच सालों से चला रहा विवाद थम जाएगा.

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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2023,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

दिल्ली की केजरीवाल सरकार और उप राज्यपाल के बीच सालों से चली आ रही अधिकारों की लड़ाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाया. सीजेआई डीवाई चंदचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ) में विधायी शक्तियों के बाहर के क्षेत्रों को छोड़कर सेवाओं और प्रशासन से जुड़े सभी अधिकार चुनी हुई सरकार के पास होंगे. हालांकि, पुलिस, पब्लिक आर्डर और लैंड का अधिकार केंद्र के पास ही रहेगा. 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, चुनी हुई सरकार के पास प्रशासनिक सेवा का अधिकार होना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने कहा, अधिकारियों की तैनाती और तबादले का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा. दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अपनी जीत बताया. क्योंकि आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि राजधानी में भूमि और पुलिस जैसे कुछ मामलों को छोड़कर बाकी सभी मामलों में दिल्ली की चुनी हुई सरकार की सर्वोच्चता होनी चाहिए. 

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच 2015 से ये विवाद चला आ रहा है. यह विवाद पिछले साल मई में उप राज्यपाल विनय सक्सेना की तैनाती के बाद और बढ़ गया था. कई मुद्दों पर स्थिति टकराव पर भी पहुंच गई थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद माना जा रहा है कि अब दिल्ली की सरकार और उप राज्यपाल दफ्तर के बीच सालों से चला रहा विवाद थम जाएगा.   

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वे मुद्दे जब आमने सामने आ गए एलजी और सीएम 

- टीचरों की ट्रेनिंग का मुद्दा

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने पिछले साल टीचरों को ट्रेनिंग के लिए फिनलैंड भेजने का फैसला किया था. लेकिन एलजी दफ्तर की ओर से इसपर मंजूरी नहीं मिली थी. इसके बाद सीएम केजरीवाल ने अपने विधायकों के साथ एलजी दफ्तर के बाहर धरना भी दिया था. 

- मोहल्ला क्लीनिक का मामला

मोहल्ला क्लीनिकों के मामले में भी केजरीवाल सरकार और उप राज्यपाल दफ्तर के बीच टकराव देखने को मिला था. दरअसल, पिछले साल के अंत में डॉक्टरों और स्टाफ को समय पर सैलरी नहीं मिलने पर कई क्लीनिक के बंद होने की भी नौबत आ गई थी. इसके बाद राज्य सरकार और एलजी दफ्तर ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया था. बाद में विधानसभा की याचिका समिति ने हेल्थ सचिव और वित्त सचिव को तलब किया था. इसके बाद सैलरी रिलीज की गई थी. 

- एमसीडी के चुनाव में टकराव

पिछले दिनों एमसीडी में मेयर चुनाव के समय भी एलजी और दिल्ली सरकार में टकराव हुआ था. चुनाव के लिए अफसरों की नियुक्ति और मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ था. इसके बाद चुनाव टालना पड़ा था. बाद में ये मामला कोर्ट पहुंचा था. ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. 

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- जल बोर्ड के कामों को लेकर भी विवाद

दिल्ली जल बोर्ड को लेकर भी दिल्ली सरकार और अधिकारियों में विवाद देखने को मिला था. केजरीवाल सरकार ने आरोप लगाया था कि बजट पास होने के बावजूद वित्त विभाग ने फंड रिलीज नहीं किया, इसके चलते जल बोर्ड की कई योजनाओं पर इसका असर पड़ा था. इसके बाद विधानसभा की याचिका समिति ने कुछ अधिकारियों को तलब भी किया था. 

- पेंशन में देरी का मामला

दिल्ली सरकार की ओर से बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को दी जाने वाली पेंशन को लेकर भी टकराव देखने को मिला था. दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि पेंशन के लिए फंड रोक दिया गया, इसके चलते बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को समय से पेंशन नहीं मिल पा रही है. इस मामले में भी दिल्ली सरकार ने कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे. 

 


 

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