दिल्ली में पटाखों के शोर में ग्रीन क्रैकर्स भी फुस्स, कारोबारियों ने मांगी छूट

1 जनवरी 2023 तक राजधानी दिल्ली में तक पटाखों के स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग पर कंप्लीट बैन होगा. इस ऐलान के बाद पटाखा कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने इसे लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि पिछले 5 साल से त्योहारों के ठीक पहले पटाखों के कंप्लीट बैन से बिजनेस में लॉस हो रहा है और वे कर्ज में डूबे हुए हैं.

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सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.

राम किंकर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

दिल्ली सरकार ने ऐलान किया है कि अगले साल यानी 1 जनवरी 2023 तक पटाखों के स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग पर कंप्लीट बैन लगा दिया जाएगा. हालांकि, कारोबार से जुड़े व्यापारी परेशान हैं पर अभी भी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी यानी डीपीसीसी के आधिकारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं.

ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐलान भले ही हो गया है लेकिन लिखित आदेश नहीं आया है. इसके बाद ही पुलिस प्रशासन और कारोबारियों को लिखित आदेश मिलने की संभावना है. गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 1 सितंबर को पटाखों के अस्थायी लाइसेंस का अखबारों में विज्ञापन निकाला और 9 सितंबर को फॉर्म जमा करने की आखिरी डेट से पहले ही पटाखों पर कंप्लीट बैन का ऐलान हो गया.

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दिल्ली के जामा मस्जिद के पटाखा कारोबारी अमित जैन का कहना है, "अब 40 फीसदी कारोबार बचा है. पिछले 5 साल से हर बार दिवाली और दशहरे से पहले बैन लग जाने से धंधा खतम हो गया है. पूरे देश में ग्रीन क्रैकर्स जला सकते हैं लेकिन दिल्ली में इसकी मनाही है."

सदर बाजार क्रैकर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी HS छाबड़ा का कहना है, "पुलिस ने पटाखों के लाइसेंस लेने के लिए अखबार में विज्ञापन निकाला और ठीक फॉर्म जमा करने के अंतिम दिन कंप्लीट बैन लगा दिया गया. स्टॉक रखने वालों का लॉस हो गया है."

पटाखों के परमानेंट लाइसेंस के चांदनी चौक के विक्रेता महेश्वर दयाल का कहना है, "पिछले 5 साल से त्योहार के ठीक पहले पटाखों के कंप्लीट बैन से बिजनेस में लॉस हो रहा है और हम कर्ज में डूबे हुए हैं. 60 साल से इस धंधे में हैं अब इस उम्र में क्या करें? हमें दूसरा रोजगार दे दो. जीएसटी, इनकम टैक्स देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं. कई दुकानदार कर्ज लेकर काम चला रहे हैं."

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आखिर क्यों लगता है बैन?

त्योहारों से ठीक पहले पटाखों पर बैन का लग जाना पहली बार नहीं है. दरअसल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में एनवायरनमेंट पिटिशन लगने के बाद पटाखों पर रोक लग गई थी. तब ग्रीन पटाखे विकसित किए गए. नागपुर की नीरी नाम की संस्था ने एनवायरनमेंट पर स्टडी करके ग्रीन पटाखे विकसित किए जिनसे 70% प्रदूषण कम होता है.

पटाखों के केमिकल और फार्मूले बदले गए और तभी कोर्ट ने और सेंट्रल पॉल्यूशन बोर्ड ने ग्रीन पटाखे छोड़ने की अनुमति दी. आईआईटी कानपुर ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी. साल 2019 में ग्रीन क्रैकर्स की मैन्युफैक्चरिंग भी शुरू हो गई बावजूद इसके पिछले 3 साल से पटाखों पर कंप्लीट बैन लग रहा है.

दिल्ली फायर वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जैन ने बताया, "सेंट्रल एयर क्वॉलिटी कमीशन ने भी इस बात की इजाजत दे रखी है कि एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 200 के पार जाने पर पटाखे नहीं चलाए जा सकते. बावजूद इसके सरकारी बैन पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों की पूरी तरह से अनदेखी है. सरकार को ग्रीन पटाखों की अनुमति देनी चाहिए."

लाखों कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट

राजधानी दिल्ली में पटाखों के 200 परमानेंट और 400 अस्थायी लाइसेंस धारक हैं. दिल्ली पुलिस कुछ साल पहले तक करीब हजार लाइसेंस देती थी जो प्रतिबंध के बाद अब लगातार घट रहे हैं. पटाखा कारोबार से असंगठित तौर पर लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है. राजधानी में करीब 1000 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार होता है. सीजन वाले इस काम में बागपत, बड़ौत, मेरठ और सहारनपुर से आने वाली बड़ी मुस्लिम आबादी जुड़ी है जिन पर रोजी-रोटी का संकट आन पड़ा है.

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अवैध कारोबार और मुनाफाखोर सक्रिय

दिल्ली फायर वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव जैन का दावा है कि प्रतिबंध के बावजूद भी पटाखे फोड़ने के पीछे अवैध कारोबार और मुनाफाखोरी की सक्रियता है. कंप्लीट बैन के बाद कारोबार ठप होने पर पटाखों की तस्करी बढ़ जाती है. लोग भी एनसीआर के शहरों से पटाखे खरीद कर पहले ही रख लेते हैं. पिछले साल भी बैन के बावजूद त्योहारों पर पटाखे फोड़े गए थे.

कई रिसर्च में दावा किया गया कि पटाखों से प्रदूषण सिर्फ 4% होता है. आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सर्दियों में प्रदूषण की वजह पटाखों से अधिक पराली है. वहीं, ठंड से बचने के लिए किए जाने वाले उपाय यानी जैव ईंधन जलाने से भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है.

 

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