NEET PG Counseling: आज दिल्ली में LNJP डॉक्टरों की हड़ताल, OPD सेवा का बहिष्कार

कई डॉक्टर आगे आकर नीट पीजी की काउंसलिंग के जल्द करवाने के पक्ष में हैं. अब दिल्ली के LNJP अस्पताल के रेसिडेंट डॉक्टर आज सभी ओपीडी सेवा का बहिष्कार करने जा रहे हैं.

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आज दिल्ली में LNJP डॉक्टरों का प्रदर्शन ( सांकेतिक फोटो) आज दिल्ली में LNJP डॉक्टरों का प्रदर्शन ( सांकेतिक फोटो)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 03 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 12:31 AM IST
  • आज दिल्ली में LNJP डॉक्टरों का प्रदर्शन
  • OPD सेवा का होगा बहिष्कार

नीट पीजी की काउंसलिंग ( NEET PG Counseling) को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. जो मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन है, उस विवाद पर ही देश में भी विरोध प्रदर्शन तेज हो चुका है. कई डॉक्टर आगे आकर नीट पीजी की काउंसलिंग के जल्द करवाने के पक्ष में हैं. अब दिल्ली के LNJP अस्पताल के रेसिडेंट डॉक्टर आज सभी ओपीडी सेवा का बहिष्कार करने जा रहे हैं.

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दिल्ली में LNJP डॉक्टरों का प्रदर्शन

उनकी तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया को तेज किया जाए और जल्द ही नीट काउंसलिंग भी शुरु करवाई जाए. तर्क दिया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है, ऐसे में पहले से दवाब में चल रहे डॉक्टरों को और ज्यादा तनाव नहीं दिया जा सकता है. प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने एक चिट्ठी भी लिखी है. उस चिट्ठी में स्पष्ट बताया गया है कि उन्हें देश के स्वास्थ्य मंत्री से आश्वासन मिला था. कहा गया था कि तीन दिनों के अंदर कोई ठोस फैसला लिया जाएगा. लेकिन सरकार की तरफ से उस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया गया.

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को इस बात की उम्मीद भी कम ही दिख रही है कि जनवरी में भी नीट काउंसलिंग शुरू हो पाएगी. ऐसे में सभी को यही डर सता रहा है कि ये विवाद आगे भी खिचता जाएगा और अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी रहेगी. पिछले कई दिनों देश के कई अस्पतालों में ओपीडी सेवा को बंद रखा गया है. 

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किस बात पर है विवाद?

विवाद सिर्फ इस बात को लेकर है कि कार ने NEET PG में 27% ओबीसी और 10% आपक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को देने का फैसला लिया था, जिसे कुछ मेडिकल छात्रों ने चुनौती दी है. छात्रों ने NEET PG में EWS और OBC वर्ग को आरक्षण की वैधता को चुनौती दी गई है. छात्रों का कहना है कि निम्न आय वर्ग की परिभाषा में 8 लाख रुपये तक सालाना आय के लोगों को रखना मनमाना फैसला है. इस मुद्दे पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है. 

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