राजधानी दिल्ली में सारी मशीनरी कोरोना से जंग में लगी हुई है. ऐसा लगता है कि इस मॉनसून सीजन में भी दिल्ली में जलभराव की समस्या से राहत नहीं मिलेगी. ऐसा इसलिए कि दिल्ली नगर निगम ने अभी तक अपने नालों की सफाई पूरी नहीं की है. कोरोना की दूसरी लहर में नालों की सफाई का काम अधर में लटक गया और अब तक महज 40 फीसदी नालों की सफाई हो पाई है.
एमसीडी का ड्रेन्स विभाग नालों की सफाई करता है. कुछ ही वक्त में मानसून भी आ जाएगा ऐसे में दिल्ली में नालों की सफाई की हकीकत डराती है. डेम्स विभाग का दावा है कि निगम के अंतर्गत छोटे नालों की सफाई मार्च के पहले हफ्ते में शुरू हो गई थी. फिर तीनों एमसीडी ने नालों की पूरी तरह से सफाई की नई डेडलाइन 15 मई तय की थी. नॉर्थ दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का दावा है “मॉनसून आने के पहले गाद निकालने का काम पूरा कर लिया जाएगा. वहीं पीडब्लूडी, दिल्ली पुलिस समेत सभी एजेंसियों को पत्र के जरिए चेताया.“
साउथ एमसीडी के 4 ज़ोन को मिलाकर 243 नाले हैं जिनकी लंबाई करीब 160 किलोमीटर है और ये 4 फुट गहरे है. नॉर्थ एमसीडी में 192 नाले हैं जिसकी लंबाई 109 किमी है. ईस्ट एमसीडी में 223 नाले हैं जिनकी लंबाई 122 किमी है. पीडब्लूडी के नालों की लंबाई करीब 2064 किमी है. इनकी सफाई अभी शुरू ही हुई है. साउथ एमसीडी की मेयर अनामिका का कहना है कि बारिश के मौसम में शहर में होने वाली जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों से इंतजाम करने को कहा है ताकि जमा पानी को वापस नदी में मोड़ा जा सके.
महापौर ने मानसून आरंभ होने से पहले नालों से गाद निकालने के कार्य को पूरा करने के लिए अधिकारियों को ताकीद किया. बता दें कि पिछले साल मॉनसून में मिंटो रोड पर जलभराव में एक शख्स की डूबकर मौत हो गई थी. 56 साल के शख्स की मौत के बाद दिल्ली सरकार की तरफ से फैसला लिया गया कि पानी का लेवल 1.5 फीट से ऊपर बढ़ जाने पर मिटो रोड को जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी जाएगी और नियम तोड़ने वाले पर मुकदमा होगा.
राम किंकर सिंह