दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफे में उन्होंने पद छोड़ने का कारण निजी बताया है. 1969 बैच के आईएएस अफसर अनिल बैजल दिसंबर 2016 में दिल्ली के उपराज्यपाल बने थे. बैजल 5 साल 4 महीने तक उपराज्यपाल रहे.
बैजल और आम आदमी पार्टी की सरकार के बीच कई मामलों में टकराव की स्थिति दिखी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बैजल के बीच कई बार फैसलों को लेकर टकराव देखा गया.
दिल्ली में जमीन, सर्विसेस और लॉ एंड ऑर्डर सीधे तौर पर एलजी के अंडर में आते हैं. सर्विस डिपार्टमेंट पर नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है.
बैजल और आम आदमी पार्टी के बीच सबसे बड़ा टकराव जून 2018 में हुआ था. तब मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने मंत्रियों मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और गोपाल राय के साथ मिलकर एलजी ऑफिस में धरना दिया था. उनका आरोप था कि दिल्ली में जो आईएएस अफसर हैं, वो सरकार की नहीं सुनते हैं. इसके अलावा उनका ये भी आरोप था कि बैजल सरकार की डोर-टू-डोर राशन स्कीम को मंजूरी नहीं दे रहे हैं.
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जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि एलजी दिल्ली सरकार की 'सहायता और सलाह' से बंधे हुए हैं. हालांकि, पिछले साल जुलाई में तनातनी तब बढ़ गई जब बैजल ने दिल्ली सरकार के वकीलों के पैनल को खारिज कर दिया. दरअसल, केजरीवाल सरकार ने लाल किला हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए वकीलों का पैनल बनाया था, जिसे बैजल ने खारिज कर दिया था.
इसी साल मार्च में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक ट्वीट के कई अर्थ लगाए जाने लगे. केजरीवाल ने 12 मार्च को ट्वीट कर सवाल पूछा था, 'क्या लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल दिल्ली के नए एलजी बनने जा रहे हैं?'
Is Mr Praful Patel, Administrator of Lakshdweep, being made the next LG of Delhi?
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 12, 2022दिल्ली में बैजल बनाम AAP सरकार
- 31 दिसंबर 2016: अनिल बैजल दिल्ली के उपराज्यपाल बने. बैजल दिल्ली के 21वें राज्यपाल थे.
- दिसंबर 2017: राज्यसभा सांसदों ने आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ 'चपरासी' की तरह बर्ताव किया जा रहा है.
- मार्च 2018: बैजल ने दिल्ली सरकार को अपनी डोर-टू-डोर राशन की डिलीवरी की योजना का प्रस्ताव केंद्र के पास भेजने को कहा. केजरीवाल ने दावा किया कि राजनीति के चलते उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया.
- जून 2018: आईएएस अफसरों की हड़ताल के खिलाफ सीएम केजरीवाल ने अपने मंत्रियों समेत एलजी ऑफिस में धरना दिया.
- जुलाई 2018: सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने आदेश दिया कि एलजी दिल्ली सरकार की 'सहायता और सलाह' से बंधे हुए हैं. दोनों को मिलकर काम करना चाहिए.
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- जुलाई 2020: दिल्ली हिंसा से जुड़े मामलों की पैरवी के लिए दिल्ली पुलिस के वकीलों के पैनल के एलजी के प्रस्ताव को केजरीवाल सरकार ने खारिज कर दिया. बाद में बैजल ने गृह मंत्रालय को दिल्ली पुलिस के पैनल के प्रस्ताव को मंजूरी देने का आदेश दिया.
- अप्रैल 2021: एलजी को चुनी हुई सरकार से ज्यादा अधिकार देने वाला कानून लागू हुआ.
- जुलाई 2021: किसान आंदोलन और लाल किला हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए दिल्ली सरकार के वकीलों के पैनल के केजरीवाल सरकार के प्रस्ताव को बैजल ने खारिज कर दिया.
- अप्रैल 2022: गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली (अमेंडमेंट) एक्ट 2021 को बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि दिल्ली सरकार ने फैसले लेते समय एलजी को अक्सर अंधेरे में रखा.
अब आगे क्या?
अनिल बैजल के इस्तीफे के बाद अब नए उपराज्यपाल की नियुक्ति होगी. न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि केंद्र सरकार अब किसी ब्यूरोक्रेट की बजाय किसी राजनीतिक व्यक्ति को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त कर सकती है. हालांकि, इस बीच लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल का नाम भी चर्चा में आ रहा है.
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