करेगुट्टा पर फहरा दिया तिरंगा, नक्सलियों के सबसे मजबूत गढ़ में सुरक्षाबलों की बड़ी जीत

Victory on Karegutta: सुरक्षा बलों ने इस पर तिरंगा फहराकर साफ संदेश दिया है कि अब इस इलाके में नक्सलियों का कब्जा खत्म हो चुका है. यही नहीं, जीत के बाद बलों ने आसपास की 3-4 पहाड़ियों पर भी अभियान तेज कर दिया है, जहां करीब 250 नक्सलियों के छिपे होने की खबर है.

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नक्सलियों के गढ़ में जारी 'ऑपरेशन संकल्प'. (फाइल फोटो) नक्सलियों के गढ़ में जारी 'ऑपरेशन संकल्प'. (फाइल फोटो)

सुमी राजाप्पन

  • रायपुर/बीजापुर ,
  • 30 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 4:30 PM IST

भारतीय सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों के मजबूत ठिकाने करेगुट्टा पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है. 'ऑपरेशन संकल्प' के 9वें दिन मिली इस ऐतिहासिक जीत को देश का सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान माना जा रहा है. 

समुद्र तल से 5000 फीट ऊपर करेगुट्टा पहाड़ी नक्सलियों का पुराना गढ़ थी. सुरक्षा बलों ने इस पर तिरंगा फहराकर साफ संदेश दिया है कि अब इस इलाके में नक्सलियों का कब्जा खत्म हो चुका है. यही नहीं, जीत के बाद बलों ने आसपास की 3-4 पहाड़ियों पर भी अभियान तेज कर दिया है, जहां करीब 250 नक्सलियों के छिपे होने की खबर है.

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इसके लिए 500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों को हेलीकॉप्टर से पहाड़ी पर उतारा गया. शुरू में तैनात कर्मियों को आराम के लिए बाहर कर दिया गया है, जबकि बैकअप टीमों ने अपनी स्थिति संभाल ली है.

वहीं, तलहटी में एक अस्थायी कैंप भी बनाया गया है, जो सामान और सहायता का आधार है. 40 से 43 डिग्री सेल्सियस के तापमान और मुश्किल रास्तों के बावजूद जवान 40 किलो तक का सामान लेकर खड़ी चढ़ाई चढ़े और महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा किया.

केंद्र और राज्य सरकार इस अभियान पर नजर रखे हुए हैं. इस बीच तेलंगाना में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जहां कुछ लोगों ने चल रहे मिशन का विरोध किया है.

दूसरी ओर, नक्सल केंद्रीय प्रवक्ता अभय ने एक बयान जारी कर युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है और शांति वार्ता का आह्वान किया है. फिर भी ऑपरेशन संकल्प की रफ्तार कम नहीं हुई है. जवान ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से नक्सलियों के ठिकानों को ढूंढकर नष्ट कर रहे हैं. बढ़ते दबाव और रणनीतिक लाभ के साथ उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं कि नक्सलियों को जल्द ही तगड़े झटके लग सकते हैं. करेगुट्टा अब नक्सलियों का गढ़ नहीं, बल्कि भारतीय जवानों के साहस और संकल्प का प्रतीक बन गया है.

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(इनपुट:चेतन कापेवा)

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