बिहार में इंटर टॉपर घोटाला की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई कि बिहार के एक विश्वविद्यालय में गजब के कारनामे सामने आए हैं. विश्वविद्यालय के कारनामे को देख आप हैरान ही नहीं बल्कि परेशान भी हो जाएंगे. आप ये सोचने पर विवश हो जाएंगे कि क्या ऐसा भी हो सकता है.
बिहार के ऐसे अजूबे विश्वविद्यालय का नाम है ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय. इस विश्वविद्यालय से अगर आपने परीक्षा दी हो और रिजल्ट निकलने पर उसमें कोई गड़बड़ी नजर आए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. मिथिला विश्वविद्यालय के लिए ये कोई आश्चर्य वाली बात नहीं होगी. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि इस विश्वविद्यालय ने जो रिजल्ट जारी किए उससे इस कारनामे का खुलासा हुआ है. कमाल का विश्वविद्यालय है मिथिला विश्वविद्यालय. 50 अंक की परीक्षा में छात्र को दिए जाते हैं 56 अंक. अगर आपने परीक्षा इंग्लिश की दी है त रिजल्ट दिया जायेगा कॉमर्स का. अब आपको समझ में आ गया होगा कि है न कमाल का विश्वविद्यालय है मिथिला विश्वविद्यालय.
ऐसा अजूबा कारनामा करनेवाली ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी छात्रों का करियर बनाने के बजाय उनके भविष्य के साथ ना सिर्फ खिलवाड़ कर रही है बल्कि यूनिवर्सिटी भी अपनी प्रतिष्ठा को तार तार कर रही है. ऐसी त्रुटि किसी एक के साथ नहीं बल्कि सैकड़ों छात्रों के रिजल्ट में है. यही कारण है कि महज तीन दिन के अंदर यूनिवर्सिटी को लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने अपने रिजल्ट को लेकर अपनी शिकायत परीक्षा विभाग में दर्ज जी है. दर्ज की गई शिकायतों में ज्यादातर शिकायतें कॉपी में पुनर्मूल्यांकन की मांग को लेकर है. शिकायत करने वाले छात्रों की संख्या में अब भी कोई कमी नहीं आई है लेकिन इन छात्रों की समस्या का निदान करने वाला विश्वविद्यालय में कोई नहीं है.
50 नंबर के एग्जाम में दिए 52 नंबर
ऐसी ही कहानी है राहुल कुमार यादव की. राहुल इंग्लिश ऑनर्स से पढ़ाई कर रहा है. पिछले साल ही पार्ट 3 का परीक्षा दी. 50 अंक की इस परीक्षा में राहुल को 52 अंक मिल गए. अगर राहुल को 100℅ भी अंक दिए
जाते तो भी 50 अंक ही होते. अब सवाल उठता है कि राहुल को 50 में से 52 अंक कैसे मिले. बात इतने पर ही खत्म नहीं होती बल्कि राहुल ने इस अंक को ठीक कराने के लिए यूनिवर्सिटी को कई बार लिखित
शिकायत की लेकिन अब तक उसका अंक पत्र ठीक नहीं हुआ. साल बीत गए लेकिन परिणाम जीरो. थक हार कर राहुल ने फिर इस साल दोबारा पार्ट 3 की परीक्षा दी ताकि सब ठीक हो जाए. लेकिन इस बार तो
विश्वविद्यालय ने और ही कमाल किया. राहुल की परेशानी खत्म होने के बावजूद और बढ़ ही गई. दरअसल राहुल अंग्रेजी से ऑनर्स की परीक्षा दी पर उसे कॉमर्स का रिजल्ट दे दिया गया.
छात्र के बर्बाद हो गए दो साल
अब राहुल टूट चुका है उसे समझ नहीं आ रहा कि वह करे तो क्या करे. राहुल के दो कीमती साल बर्बाद हो गए. अकेला राहुल ही नहीं बल्कि राहुल जैसे सैंकड़ों छात्र है जो विश्वविद्यालय के इस अजूबे कारनामे से
परेशान है. थक हार कर छात्र अपनी शिकायत अब राजभवन से करने की सोच रहा है. इस मामले में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति ने कहा कि रिजल्ट में गड़बड़ी की जांच की जा रही है.
सुजीत झा / रोहित गुप्ता