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करुणानिधि से जया तक, फि‍ल्मी बैकग्राउंड से थे तमिलनाडु के ये 4 CM

पूजा बजाज
  • 07 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST
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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम. करुणानिधि का मंगलवार शाम चेन्नई के कावेरी अस्पताल में निधन हो गया है. उनकी उम्र 94 साल थी. करीब 6 दशकों तक राजनीतिक शिखर पर रहने वाली ये शख्‍सियत, तमिल सिनेमा के बेहतरीन लेखक, स्क्रीनराइटर के तौर पर भी अपनी पहचान कायम की. फि‍ल्मी दुनिया से राजनीति में कदम रखने के वाले तमिलनाडु के ये इकलौते सीएम नहीं थे. तमिलनाडु की सियासत में सीएम बनने वाले चार हस्तियां सिनेमा से जुड़ी थीं. 

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करीब 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने वाले करुणानिधि ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में एक स्क्र‍िप्ट राइटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की. वे द्रविड़ आंदोलन से जुड़े थे और उसके समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे. उन्होंने तमिल सिनेमा में 'पराशक्ति' नाम की फिल्म के जरिए अपने राजनीतिक विचारों का प्रचार शुरू किया. पराशक्ति तमिल सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई. शुरू में इस फिल्म पर बैन लगा दिया गया था, लेकिन अंत में इसे 1952 में रिलीज कर दिया गया. यह बॉक्स ऑफिस पर एक बहुत बड़ी हिट फिल्म साबित हुई. इस फिल्म का रूढ़िवादी हिंदुओं ने विरोध किया. क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिसने ब्राह्मणवाद की आलोचना की थी.

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करूणानिधि  ने पराशक्ति के बाद इसी तरह की  दो अन्य फ़िल्में "पनाम" और "थंगारथनम" बनाई. बता दें 1950 के दशक में उनके दो नाटकों को प्रतिबंधित कर दिया गया था.

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जयललिता ने अपने चार दशक के राजनीतिक जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं. 15 वर्ष की उम्र में फिल्मी करियर शुरू करने वाली जयललिता एक सुप्रसिद्ध तमिल एक्ट्रेस बनीं. एक विद्यार्थी के तौर पर भी पढ़ाई में उनकी काफी रुचि‍ रही. जयललिता ने एमजीआर के साथ 28 फिल्मों में काम किया. एमजीआर तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थे और भारतीय राजनीति के सम्मानित नेताओं में थे.

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70 के दशक तक आते-आते डीएमके के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक बनकर उभरे एमजीआर ने खुद को गरीबों का मसीहा बनाकर पेश किया. तमिलनाडु के सीएम रहे एमजीआर की फिल्मों का भी एक हद तक योगदान था. थिएटर में दिलचस्पी के चलते नौजवान एमजीआर ने जल्द ही फिल्मों का रुख किया. 1936 में फिल्म 'साथी लीलावती' से टॉलीवुड में डेब्यू करने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अगले तीन दशक तक एमजीआर तमिल सिनेमा के आसमान का चमकता सितारा बने रहे. वो मुख्यमंत्री भी बने. 

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जयललिता फिल्मी दुनिया को अलविदा कह एमजीआर के साथ राजनीति में आ गईं. कहा जाता है कि अंग्रेजी में उनकी मजबूती को देखकर एमजीआर उनको राजनीति में लेकर आए थे.

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अन्नादुरै तमिलनाडु के लोकप्रिय नेता, अपने प्रदेश के प्रथम गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के संस्थापक थे. अन्नादुरै अपने भाषणों के लिए बहुत मशहूर थे. वह तमिल भाषा के समर्थ लेखक भी थे. उन्होंने न सिर्फ कई नाटक लिखे, बल्कि उनमें अभिनय भी किया. उनके कुछ नाटकों पर बाद में फिल्में भी बनाई गईं. तमिल सिनेमा को राजनीतिक प्रचार का अस्त्र बनाने वालों में उनका नाम पहला है. उनकी शवयात्रा में सबसे ज्यादा लोग शामिल हुए और इस बात के लिए इसे 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी शामिल किया गया.

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