साउथ सुपरस्टार थलपति विजय की आने वाली फिल्म ‘जन नायगन’ इन दिनों विवादों में घिरी हुई है. फिल्म के कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति भी जताई है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब विजय की किसी फिल्म को लेकर हंगामा हुआ हो. इससे पहले भी उनकी कई फिल्मों ने रिलीज से पहले और बाद में विवाद खड़े किए हैं.
‘मर्सल’ ने खड़ा कर दिया था बड़ा राजनीतिक विवाद
विजय की फिल्म ‘मर्सल’ अपने समय में सबसे ज्यादा विवादों में रही थी. फिल्म के एक सीन में जीएसटी और सरकारी योजनाओं पर टिप्पणी दिखाई गई थी, जिसे लेकर राजनीतिक हलकों में नाराजगी देखने को मिली. कुछ नेताओं ने फिल्म के डायलॉग्स हटाने की मांग की थी. हालांकि दर्शकों का फिल्म को भरपूर समर्थन मिला और बॉक्स ऑफिस पर ‘मर्सल’ सुपरहिट साबित हुई.
‘थुप्पाकी’ पर भी उठे थे सवाल
विजय की फिल्म ‘थुप्पाकी’ भी विवादों से अछूती नहीं रही. इस फिल्म पर आरोप लगे थे कि इसमें दिखाए गए कुछ सीन एक विदेशी फिल्म से मिलते-जुलते हैं. इसको लेकर मेकर्स को कानूनी नोटिस तक का सामना करना पड़ा. इसके अलावा, फिल्म में सेना और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को लेकर भी बहस हुई थी.
‘सरकार’ को लेकर सियासी हंगामा
फिल्म ‘सरकार’ में वोटिंग और राजनीतिक सिस्टम से जुड़े सीन दिखाए गए थे. इस पर कुछ राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि फिल्म एक खास पार्टी के खिलाफ संदेश देती है. फिल्म के पोस्टर और थिएटरों के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे. इसके बावजूद ‘सरकार’ ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया.
‘कावलन’ में धार्मिक भावनाओं का मुद्दा
विजय की फिल्म ‘कावलन’ को लेकर भी विवाद हुआ था. फिल्म के कुछ डायलॉग्स और सीन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगे थे. हालांकि बाद में मामला शांत हो गया और फिल्म रिलीज हुई.
अब ‘जन नायगन’ पर मचा हंगामा
अब विजय की नई फिल्म ‘जन नायगन’ को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है. फिल्म के कुछ हिस्सों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे मेकर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फैंस का मानना है कि हर बार की तरह इस बार भी विवाद के बावजूद फिल्म को दर्शकों का प्यार मिलेगा. ये उनकी रिटायरमेंट के ऐलान के बाद आखिरी फिल्म भी होने वाली है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो थलपति विजय की फिल्मों का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन हर बार उन्होंने साबित किया है कि कंट्रोवर्सी उनकी पॉपुलैरिटी को कम नहीं कर पाती.
आरती गुप्ता