हेमा कमेटी रिपोर्ट: कैसे खुली मलयालम इंडस्ट्री की पोल? क्यों अब तक चुप थीं महिलाएं? पढ़ें डिटेल

2017 में बनी हेमा कमेटी की रिपोर्ट 19 अगस्त 2024 को पहली बार पब्लिक की गई और इसके बाद से ही मलयालम इंडस्ट्री, महिलाओं के साथ होने वाले बर्तावों को लेकर कटघरे में है. आखिर ये हेमा कमेटी है क्या? ये क्यों बनाई गई? और इसकी रिपोर्ट क्या कहती है?

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क्या है मलयालम सिनेमा को हिला देने वाली जस्टिस हेमा कमेटी रिपोर्ट? क्या है मलयालम सिनेमा को हिला देने वाली जस्टिस हेमा कमेटी रिपोर्ट?

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 02 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:26 PM IST

मलयालम सिनेमा इन दिनों सवालों के घेरे में है. मलयालम फिल्मों में काम कर रहीं एक्ट्रेसेज और इंडस्ट्री से जुड़ी बाकी महिलाएं अपने साथ हुए सेक्सुअल हैरेसमेंट, असॉल्ट की भयानक घटनाएं शेयर कर रही हैं. 

इंडस्ट्री में काम कर रहे कलाकारों के हित के लिए बनी एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) के प्रेजिडेंट, मलयालम सिनेमा आइकॉन मोहनलाल ने 17 सदस्यों की एग्जीक्यूटिव कमेटी समेत इस्तीफा दे दिया है. AMMA समेत, मलयालम सिनेमा के दूसरे संगठनों में पदाधिकारी रहे बड़े पुरुष पदाधिकारियों पर भी सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगे हैं और इस तरह के सारे मामलों की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन हो चुका है. 

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ये पूरा मामला हेमा कमेटी की रिपोर्ट से जुड़ा है. 2017 में बनी इस कमेटी की रिपोर्ट 19 अगस्त 2024 को पहली बार पब्लिक की गई और इसके बाद से ही मलयालम इंडस्ट्री, महिलाओं के साथ होने वाले बर्तावों को लेकर कटघरे में है. आखिर ये हेमा कमेटी है क्या? ये क्यों बनाई गई? और इसकी रिपोर्ट क्या कहती है? आइए बताते हैं... 

बड़ी मलयालम एक्ट्रेस पर सेक्सुअल असॉल्ट से शुरू हुआ तूफान
फरवरी 2017 में टॉप मलयालम एक्ट्रेसेज में से एक के साथ ऐसी घटना हुई, जिसने सिर्फ मलयालम इंडस्ट्री को ही नहीं पूरे देश को शॉक कर दिया. शूट से लौट रहीं एक्ट्रेस को किडनैप कर लिया गया और एक चलती कार में कई पुरुषों ने उनपर सेक्सुअल असॉल्ट किया. इस मामले में मलयालम इंडस्ट्री की बड़ी शख्सियत, एक्टर-प्रोड्यूसर दिलीप का कनेक्शन सामने आया. दिलीप को अरेस्ट भी किया गया और थोड़े समय में उन्हें जमानत भी मिल गई. 

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इस पूरी घटना को लेकर इंडस्ट्री ने जिस तरह ट्रीट किया और पुरुष कलाकारों के भावना पर इंसेंसिटिव कमेंट्स के बाद, मलयालम इंडस्ट्री की कई लीडिंग एक्ट्रेसेज ने हाथ मिलाया. मलयालम सिनेमा में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और बर्ताव को लेकर इंडस्ट्री की लीडिंग एक्ट्रेसेस मंजू वरियर, पार्वती, भावना, अंजलि मेनन, गीतू मोहनदास, विधु विन्सेंट, रीमा कलिंगल, रम्या नम्बीसन, दीदी दामोदरन और सुरभि लक्ष्मी वैचारिक रूप से साथ आईं और मई 2017 में 'वुमन इन सिनेमा' (WCC) इनिशिएटिव की नींव रखी. 1 नवंबर 2017 को एक्ट्रेस रीमा कलिंगल ने WCC को एक सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर करवाया. 

WCC ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन से मुलाकात की और उनसे एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की जो सिनेमा से जुड़ी महिलाओं की समस्याओं को स्टडी करे और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कदम उठाए. इस पिटीशन के बाद केरल सरकार ने केरल हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज, जस्टिस के. हेमा के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया. इस कमेटी में वेटरन एक्ट्रेस शारदा और रिटायर्ड आई.ए.एस. ऑफिसर के. बी. वलसला कुमारी भी सदस्य थीं. 

कमेटी ने दी रिपोर्ट मगर नहीं आई सामने 
हेमा कमेटी ने 31 दिसंबर 2019 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. लेकिन ये रिपोर्ट सामने नहीं आई और सरकार ने 5 साल तक रिपोर्ट पर कोई एक्शन नहीं लिया. 6 जुलाई 2024 को, एक RTI के जवाब में केरल के स्टेट इन्फॉर्मेशन कमीशन ने केरल सरकार को आदेश दिया कि व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक करने वाली जानकारी को हटाकर, 24 जुलाई तक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.

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रिपोर्ट रिलीज होने की तारीख पर ही एक फिल्म प्रोड्यूसर ने हाई कोर्ट में याचिका दी कि इस रिपोर्ट से, बतौर विटनेस, उसके 'राईट टू प्राइवेसी' का हनन हो सकता है और उन्हें 'बलि का बकरा' बनाया जा सकता है. इस याचिका के बाद हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया. लेकिन 13 अगस्त को कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से किसी के 'राईट टू प्राइवेसी' का हनन नहीं होगा और सार्वजनिक हित के लिए रिपोर्ट का सामने आना जरूरी है. कोर्ट के आदेश के बाद 19 अगस्त 2024 को हेमाकमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई. और इस रिपोर्ट के सामने आते ही मलयालम इंडस्ट्री में कोहराम मच गया.

महिलाओं को मलयालम इंडस्ट्री में होने वाली समस्याएं
हेमा कमेटी ने पाया कि एक्ट्रेस समेत, फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं की 30 कैटेगरी हैं. इसमें प्रोड्यूसर, डायरेक्टर मेकअप आर्टिस्ट, सिंगर, एडिटर से लेकर जूनियर आर्टिस्ट जैसी कैटेगरी शामिल हैं. 

हेमा कमेटी ने अलग-अलग माध्यमों से लगभग सभी कैटेगरी में काम करने वाली महिलाओं से बात करने की कोशिश की. जिसके आधार पर उन्होंने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की 17 बड़ी समस्याएं बताई: 

1. इंडस्ट्री में एंट्री और काम करने के लिए महिलाओं से सेक्स की डिमांड 

2. महिलाओं का सेक्सुअल हैरेसमेंट, दुर्व्यव्यहार और सेक्सुअल असॉल्ट

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3. सेक्सुअल डिमांड पूरी न करने पर टॉर्चर

4. टॉयलेट और चेंजिंग रूम जैसे बेसिक चीजों की कमी 

5. इंडस्ट्री में सुरक्षा की कमी

6. गैर कानूनी तरीके से महिलाओं और अन्य व्यक्तियों पर बैन लगाना 

7. बैन की धमकी देकर महिलाओं की आवाज दबाना

8. इंडस्ट्री में जेंडर के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव और पुरुषों का दबदबा

9. नशे के असर में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार

10. काम पर या फोन पर अपमानजनक और अश्लील कमेंट्स

11. पर्सनल जरूरतों को सूट करने के हिसाब से प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट को न निभाना 

12. तय की हुई फीस न मिलना 

13. जेंडर के आधार पर फीस में भेदभाव- महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग फीस 

14. महिलाओं को कम मौके देना, खासकर टेक्निकल चीजों में

15. ऑनलाइन हैरेसमेंट

16. महिलाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता की कमी 

17. शिकायत करने के लिए किसी कानूनी अथॉरिटी की कमी 

हेमा कमेटी की रिपोर्ट में मलयालम इंडस्ट्री में महिलाओं को होने वाली समस्याओं को डिटेल में अलग से भी स्टडी किया गया. इस स्टडी के आधार पर जो सबसे शॉकिंग बातें सामने आईं, उनमें महिलाओं की सुरक्षा और उनके बेसिक अधिकारों का मसला सबसे बड़ा था. 

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को मिलने वाला कम मेहनताना तो एक बड़ा मुद्दा था ही. मगर महिलाओं की सुरक्षा और उनके रूटीन कामकाज को असुरक्षित बनाने वाले कई बड़े कारण हेमा कमेटी की रिपोर्ट में लिस्ट किए गए. इनमें से कुछ बड़े कारण कुछ इस तरह हैं:

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ना टॉयलेट न चेंजिंग रूम 
हेमा कमेटीने जितनी महिलाओं से बात की लगभग सभी ने कहा कि सेट पर टॉयलेट फैसिलिटी या चेंजिंग रूम नहीं होते, खासकर जब दूरदराज की आउटडोर लोकेशन पर शूट होता है. महिलाओं को कपडे बदलने और टॉयलेट के लिए अक्सर पास के जंगल, झाड़ियों या बड़े पेड़ों के पीछे जाना पड़ता है. 

एक शॉकिंग घटना का जिक्र कमेटी ने किया, जिसमें एक जूनियर आर्टिस्ट को प्रोडक्शन यूनिट ने टॉयलेट जाने से मना कर दिया था क्योंकि टॉयलेट के लिए सुविधाजनक जगह तक जाने में 10 मिनट की वॉक करनी पड़ती थी. ऐसी दिक्कतों की वजह से कई महिलाओं को मेडिकल समस्याएं भी हुईं. 

एडजस्टमेंट, 'समझौता' और कास्टिंग काउच
सेक्सुअल हैरेसमेंट को रिपोर्ट ने मलयालम इंडस्ट्री की महिलाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बताया. रिपोर्ट कहती है कि इंडस्ट्री के कई बड़े और रेपुटेशन वाले नाम इस तरह की घटनाओं में शामिल रहे हैं. 

इंडस्ट्री में कदम रखने की पहली कोशिश के साथ ही ही महिलाओं से 'एडजस्टमेंट' या 'समझौता' करने के लिए कहा जाने लगता है. और उन्हें समझाया जाता है कि 'ऑन डिमांड सेक्स' के लिए तैयार रहना होगा. इंडस्ट्री में पहले से काम कर रहे लोग इस तरह का माहौल बना कर रखते हैं ताकि न्यूकमर एक्ट्रेस इस तरह की चीजों के लिए तैयार रहे. कई महिलाओं ने कमेटी के सामने ऐसी डिमांड वाले वीडियो, व्हाट्सएप्प मैसेज उर ऑडियो क्लिप पेश किए.

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सिनेमा में काम कर रहे नशे में धुत पुरुष, होटल में स्टे के दौरान रात में महिलाओं के कमरे का दरवाजा खटखटाते हैं. और इस तरह खटखटाते हैं जैसे वो दरवाजा तोड़कर कमरे में घुस जाना चाहते हैं. 

पुलिस के पास जाने को लेकर डर
महिलाओं ने कमेटी को बताया कि सेक्सुअल हैरेसमेंट या असॉल्ट को लेकर, पब्लिक पर्सनालिटी होने के नाते पुलिस के पास जाने की झिझक तो है ही. लेकिन इस तरह के मामलों के बाद पुलिस या कोर्ट के सामने जाने में और भी बुरी चीजें होने का खतरा रहता है. उनकी अपनी जान को और उनके परिवार वालों की जान को खतरा होने का रिस्क रहता है. 

शिकायत करने के अगले ही दिन उनका नाम सोशल मीडिया पर खराब किया जाने लगता है और साइबर अटैक होने लगते हैं. अश्लील और भद्दे मैसेज, तस्वीरों और भाषा के जरिए शिकायत करने वाली महिलाओं को टॉर्चर किया जाने लगता है और उसकी हिम्मत तोड़ने की कोशिश शुरू हो जाती है. उनके खिलाफ सार्वजनिक मंचों से सेक्सुअल प्रवृत्ति के बयान दिए जाने लगते हैं.

सिनेमा माफिया 
हेमा कमेटी के सामने एक बड़े एक्टर ने मलयालम सिनेमा में एक ताकतवर लॉबी होने का जिक्र किया और इन्हें 'सिनेमा का माफिया' कहा. इनके खिलाफ कोई भी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं कर सकता. ऐसे किसी भी व्यक्ति को ये लॉबी इंडस्ट्री से साफ करने में देर नहीं लगाती. कमेटी को ये प्रूफ मिले कि मलयालम इंडस्ट्री में 10-15 लोगों का एक 'पावर ग्रुप' है, जो पूरी इंडस्ट्री को कंट्रोल करता है. 

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ये लोग जब भी किसी से परेशान होते हैं तो साथ मिलकर उस व्यक्ति को इंडस्ट्री में काम करने से ही रोक देते हैं. ये लोग एक दूसरे तक सीक्रेट मैसेज के जारी ये बात पहुंचा देते हैं कि फलां व्यक्ति के साथ काम नहीं करना है और फिर लोगों के करियर खत्म हो जाते हैं.  

आवाज उठाने वाली एक्ट्रेसेज पर बैन 
हेमा कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि 2017 की दिल दहला देने वाली घटना के बाद बनी WCC की कई सदस्यों को ही इसी 'अनऑफिशियल' तरीके से बैन कर दिया गया. जिस तरह WCC की सदस्य महिलाएं एक केबाद एक मुद्दे उठाती रहीं, उसके बाद प्रोड्यूसर्स ने उन्हें बैन करना शुरू कर दिया. 

प्रोड्यूसर्स ये भी प्रेफर करते हैं कि फिल्म की कास्ट में वही लोग रहें जो इस तरह की कोई 'समस्या' न खड़ी करें यानी अपनी आवाज न उठाएं. कई पुरुष फिल्ममेकर्स ने तो सार्वजनिक रूप से ये माना है कि वो WCC से जुड़ी महिलाओं के साथ काम ही नहीं करेंगे. केवल WCC की सदस्यों ही नहीं, अन्य महिलाओं ने भी माना कि दुर्व्यवहार, सेक्सुअल हैरेसमेंट और सेक्सुअल असॉल्ट की शिकायत करते ही उन्हें इस तरह बैन कर दिया गया. 

इसके अलावा हेमा कमेटी की रिपोर्ट ने ये भी हाईलाइट किया कि ऐसे नियम बना दिए जाते हैं, जिससे टेक्निकल डिपार्टमेंट्स में महिलाएं कम से कम आएं. इस तरह सेट्स पर और इंडस्ट्री में महिलाओं की गिनती कम बनी रहती है, जिससे पुरुषों को उनके खिलाफ एकजुट होने में मदद मिलती है.

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