फरीदा जलाल ने अपनी जिंदगी के कई साल बॉलीवुड को दिए हैं. कई दशकों से वो हिंदी सिनेमा का हिस्सा बनी हुई हैं. 'कुछ कुछ होता है', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी बड़ी फिल्मों में उन्होंने अहम रोल निभाए. पिछली बार फरीदा को भंसाली की सीरीज 'हीरामंडी' में देखा गया था. अपने इंटरव्यू में फरीदा जलाल बहुत प्यार से बीते दिनों और उस वक्त के सितारों को याद करती हैं. अब उन्होंने अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के बारे में बात की है.
फरीदा ने की अमिताभ-जया पर बात
फरीदा जलाल ने अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के साथ कई फिल्मों में स्क्रीन स्पेस शेयर किया है. इस बीच उनकी दोनों से अच्छी दोस्ती भी हो गई. जब अमिताभ और जया एक दूसरे के साथ रिश्ते में हुआ करते थे, तब फरीदा अक्सर उनकी कॉफी डेट्स पर उनके साथ जाया करती थीं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि वो अमिताभ और जया के साथ कॉफी डेट्स पर ताज होटल जाती थीं और लॉन्ग ड्राइव्स भी एन्जॉय करती थीं.
बॉलीवुड बबल संग बातचीत के दौरान फरीदा जलाल ने कहा, 'मैं पाली हिल में रहती थी और अमित जी जुहू में. उनकी शादी होने वाली थी. दोनों में कोर्टशिप चल रहा था और झगड़े जैसे कपल के होते हैं आपस में वैसे होते थे. अमित जी रात के वक्त खुद गाड़ी चलाते और जया बगल में बैठती और मैं पीछे. मैं उनको बोलती मुझे 'कबाब में हड्डी बनाकर क्यों लाते हो आप लोग.'
बीते दिनों से हैं फरीदा को प्यार
फरीदा ने बताया कि उन्होंने कपल से रिक्वेस्ट की थी कि वे उन्हें कॉफी पर साथ न ले जाएं, क्योंकि तब उन्हें रात में देर हो जाती थी. उन्होंने कहा, 'मैं जल्दी सो जाने वालों में से थी, लेकिन फिर भी वे मुझे बुलाते थे. वो लड़ते रहते थे, मैं ये देखती रहती थी. जया रोती थी, वो मनाते थे. मुझे वो पल बहुत पसंद थे. जया के साथ मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है. मैं उन्हें प्यार से जिया बुलाती थी. कॉफी डेट से वापस आते वक्त वो फिल्मों के बारे में बात करते थे. उसके बाद वो मुझे घर छोड़ते थे और फिर अपने घर चले जाते थे. मैं बस ये कह सकती हूं कि वो बहुत प्यारे लोग हैं. उन्होंने मुझे और गुलजार साहब को अपनी शादी में बुलाया था. इंडस्ट्री से कोई और वहां नहीं था.'
सीनियर एक्ट्रेस ने सफाई देते हुए बताया कि भले ही अमिताभ और जया रोज एक दुसरे से लड़ते थे, उनकी लड़ाई कभी गंभीर नहीं होती थी. उन्होंने ये भी कहा कि उनकी लड़ाई के पीछे के कारण बेवकूफी भरे होते थे. फरीदा जलाल ने कहा, 'उनके झगड़े बहुत स्टुपिड बातों पर होते थे, जो मैं नहीं बता सकती. लेकिन बच्चों की तरह होते थे वो झगड़े. ऐसे कोई बुरी बात नहीं होती थी, प्यार मोहब्बत की अच्छी बातें होती थीं. ये जल्दी रूठ जाती थी न जया.'
फरीदा जलाल ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 60 के दशक में की थी. इसमें 'कभी खुशी कभी गम', 'कुछ कुछ होता है', 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'मजबूर', 'महल', 'पारस' जैसी फिल्में शामिल हैं.
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