Ramnagar Assembly Seat: कांग्रेस की चुनौती के बीच क्या BJP के खाते में फिर से आएगी जीत

आर्थिक रूप से रामनगर (Ramnagar Assembly seat) की आर्थिकी पर्यटन कारोबार से जुड़ी है. कॉर्बेट नेशनल पार्क यहां होने से लोग लोग पर्यटन रोजगार से जुड़े हैं. जिनमें मुख्य रुप से जिप्सी संचालन, पर्यटन गाइड, होटल रिसोर्ट संचालन में क्षेत्र में हजारों युवा अपनी आजीविका चलाते हैं.

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Ramnagar Assembly seat Ramnagar Assembly seat
  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार कहा जाता है रामनगर
  • नारायण दत्त तिवारी ने 2002 उपचुनाव में जीत हासिल की थी
  • 2017 के चुनाव में भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट यहां से MLA बने

उत्तराखंड की पर्यटन नगरी नैनीताल जिले की रामनगर विधानसभा सीट की क्रम संख्या 61 है. यह सीट राज्य की बेहद चर्चित सीटों में शुमार की जाती है. पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सीट होने के कारण इसका महत्व हमेशा से रहा है. लेकिन इस समय यह सीट भारतीय जनता पार्टी के कब्जे में है.

रामनगर जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रवेश द्वार भी है जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं. समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 345 मीटर (1,132 फुट) है. हिमालय की तलहटी में कोसी नदी के किनारे ये कस्बा बसा हुआ है. यह कस्बा जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के प्रवेशद्वार के रूप में विख्यात है और इस कारण यहां बहुत से देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं.

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उत्तर भारत का एक प्रमुख पहाड़ी पर्यटन स्थल नैनीताल भी यहां से केवल 65 किमी दूर है जिस कारण यह और भी अधिक लोकप्रिय है. रामनगर पहाड़ियों की तलहटी में बसा हुआ है और यह पश्चिमी कुमाऊं के लिए प्रवेशद्वार भी है. कुमाऊं की पहाड़ियां भी यहीं से आरम्भ होती हैं. रामनगर रेल और सड़क दोनों से पहुंचा जा सकता है.

रामनगर से निकटतम हवाईअड्डा उधम सिंह नगर जिले में स्थित पंतनगर में है जो यहां से 50 किमी दूर है. प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है.

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सामाजिक तानाबाना

रामनगर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखंड के 70 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. नैनीताल जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है.

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रामनगर विधानसभा सीट पर बहुसंख्यक मतदाता हिंदू ही हैं. 2017 में यहां कुल मतदाता 101157 थे, जिनमें 57929 पुरुष और 53128 महिला शामिल हैं. अगर जातीय समीकरण की बात करें तो यहां ठाकुर मतदाता 32%, ब्राह्मण मतदाता 23%, अनुसूचित जाति 21%, मुस्लिम मतदाता 22% हैं. इस विधानसभा सीट पर धर्म के आधार पर वोटिंग नहीं होती, क्षेत्रवाद और जातिवाद हावी रहता है.

रामनगर विधानसभा राजनीतिक रूप से हॉट सीट मानी जाती रही है. यहां पर 2002 में कांग्रेस के योगबर सिंह रावत चुनाव जीते थे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्री चुने के बाद विधायक योगबर सिंह रावत ने यह सीट नारायण दत्त तिवारी के लिए खाली कर दी थी और नारायण दत्त तिवारी ने यहां से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी.

आर्थिक रूप से रामनगर की आर्थिकी पर्यटन कारोबार से जुड़ी है. विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क यहां होने से लोग लोग पर्यटन रोजगार से जुड़े हैं. जिनमें मुख्य रुप से जिप्सी संचालन, पर्यटन गाइड, होटल रिसोर्ट संचालन में क्षेत्र में हजारों युवा अपनी आजीविका चलाते हैं. 2022 के चुनाव में इस सीट का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है. रामनगर विधानसभा से उत्तर प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहे और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी तथा अमृता रावत जैसे दिग्गजों ने यहां से चुनाव लड़ा व जीता, इसी कारण से रामनगर को हॉट सीट भी कहा जाता है.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि

रामनगर सीट पर अभी तक 5 विधानसभा चुनाव हुए हैं जिनमें एक उपचुनाव भी हुआ है. उत्तराखंड बनने के बाद 2002 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के योगबर सिंह रावत विधानसभा चुनाव जीते और 3 महीने के बाद ही योगेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के लिए सीट छोड़ दी और एक उपचुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी भारी मतों से विजयी हुए.

इस सीट पर 2002 में कांग्रेस का दबदबा रहा. 2007 में बीजेपी के दीवान सिंह बिष्ट जीते, 2012 में फिर से कांग्रेस की अमृता रावत ने इस सीट पर जीत हासिल की और 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से बीजेपी के दीवान सिंह बिष्ट विजयी हुए.

रामनगर के मतदाता व्यक्तित्व और कांग्रेस-भाजपा के नाम पर वोट देते हैं. कांग्रेस ने दो बार योगबर सिंह रावत को टिकट दिया और वह 2002 में जीते और 2007 में बीजेपी के दीवान सिंह बिष्ट से चुनाव हार गए. 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने अमृता रावत को टिकट दिया और उन्होंने लगभग 3800 वोटों से भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट को हराया. लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट से उत्तराखंड की सल्ट विधानसभा के पूर्व विधायक रणजीत रावत को टिकट दिया पर उनको भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट ने 8611 वोटों के भारी अंतर से चुनाव हराया.

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2017 का जनादेश

2017 में इस विधानसभा में लगभग 70.95% वोटिंग हुई जिसमें भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के रणजीत सिंह रावत को हराया. दीवान सिंह बिष्ट को 35839 मत मिले जबकि रणजीत सिंह रावत को 27228 मत मिले.

इस चुनाव में भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट को अपने सरल और मृदुभाषी होने का फायदा मिला और वो कांग्रेस के दबंग छवि के उम्मीदवार रणजीत सिंह रावत से चुनाव जीत गए. दीवान सिंह बिष्ट की इसी छवि की वजह से भाजपा लगातार 2002 से लेकर अब तक उन पर दांव खेलती रही है वह दो बार चुनाव हारे वह दो बार जीते हैं.

कांग्रेस को रणजीत सिंह रावत की दबंग छवि एवं बाहरी होने का नुकसान 2017 में उठाना पड़ा समझते हैं और यदि कांग्रेस फिर से रणजीत सिंह रावत पर दाव खेलती है तो 2022 में भी कांग्रेस की नैया पार होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है.

रिपोर्ट कार्ड

रामनगर के विधायक दीवान सिंह बिष्ट भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते हैं. रामनगर के शंकरपुर भूल ग्राम सभा में उनका निवास स्थान है. उनकी प्राथमिक शिक्षा रामनगर से हुई है और पेशे से साधारण किसान हैं. इनके 1 पुत्र हैं और वह भी राजनीति में सक्रिय हैं और युवा मोर्चा से जुड़े हैं. दीवान सिंह बिष्ट सरल व सौम्य स्वभाव के होने के कारण जनता में अपनी अच्छी पैठ रखते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पकड़ के चलते जीत की राह आसान हो जाती है पर प्रशासनिक पकड़ कमजोर होने के कारण लोगों में उनसे नाराजगी भी रहती है.

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