उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले की एक विधानसभा सीट है नानकमत्ता विधानसभा सीट. नानकमत्ता सूबे का एक प्रसिद्ध नगर है जो गुरुद्वारा नानक साहिब से जुड़ा हुआ है. ऐसी मान्यता है कि कैलाश पर्वत की यात्रा के समय गुरुनानक देव यहां आए थे. गुरुद्वारे के अंदर एक पीपल का पेड़ है जिसे लेकर कहा जाता है कि ये गिरा था और तब गुरुनानक देव ने इसे फिर से खड़ा कर दिया था. ये सिख धर्म का पवित्र तीर्थ स्थल है.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
नानकमत्ता विधानसभा सीट क्रम संख्या के हिसाब से उत्तराखंड की आखिरी सीट है. इसकी क्रम संख्या 70 है. ये विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. चुनावी अतीत की बात करें तो ये सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. साल 2012 के पहले चुनाव में इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के डॉक्टर प्रेम सिंह विधायक निर्वाचित हुए थे.
2017 का जनादेश
नानकमत्ता विधानसभा सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपने निवर्तमान विधायक डॉक्टर प्रेम सिंह को उम्मीदवार बनाया था. बीजेपी के डॉक्टर प्रेम सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा को 9531 वोट से हरा दिया था. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शीश राम राणा तीसरे और निर्दलीय उम्मीदवार सुनीता राणा चौथे स्थान पर रही थीं.
सामाजिक ताना- बाना
नानकमत्ता विधानसभा सीट के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो ये विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति की बहुलता वाली सीट है. इस विधानसभा क्षेत्र में सिख मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं. नानकमत्ता विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में राजपूत और ब्राह्मण मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख मतदाता है.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
नानकमत्ता विधानसभा सीट से विधायक डॉक्टर प्रेम का दावा है कि उनके कार्यकाल के दौरान इलाके का चहुंमुखी विकास हुआ है. विरोधी दलों के उम्मीदवार विधायक के दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं. बीजेपी ने इस दफे भी डॉक्टर प्रेम सिंह राणा को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने नानकमत्ता सीट से गोपाल सिंह राणा और आम आदमी पार्टी ने आनंद सिंह राणा को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट के लिए मतदान 14 फरवरी को होना है. मतगणना 10 मार्च को होगी.
रमेश चन्द्रा