राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया है. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. पार्टी को 99 सीटें मिली हैं. अन्य उम्मीदवारों के समर्थन के साथ कांग्रेस सरकार बनाने का दावा कर रही है. हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? सीएम के रूप में कांग्रेस युवा सचिन पायलट के नाम का ऐलान करेगी या फिर अनुभवी अशोक गहलोत ही राजस्थान में एक बार फिर से सीएम होंगे? या किसी तीसरे को मौका दिया जाएगा? आपको बता दें कि जयपुर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई है. इसमें तय किया गया है कि सीएम का फैसला आलाकमान करेगा.
सचिन पायलट के एक समर्थक ने तो अपने खून से चिट्ठी लिखी है कि राज्य में 21 सीटों से उठाकर पार्टी को सत्ता में लाने वाले युवा नेता पायलट को ही राज्य की कमान सौंपी जाए. राजस्थान में 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद राहुल गांधी ने राज्य की बागडोर पार्टी के दिवंगत नेता राजेश पायलट के बेटे सचिन को सौंपी थी. उन्हें जनवरी, 2014 में राजस्थान कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था.
2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होने पर सचिन पायलट ने संकल्प लिया था कि जब तक पार्टी सत्ता में नहीं लौटती वह साफा नहीं बांधेंगे. सचिन ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और राज्य की सत्ता में उसकी वापसी सुनिश्चित करने के लिए राज्य में पांच लाख किमी से अधिक की यात्रा की थी. वर्ष 2004 में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र दौसा से 26 वर्ष की आयु में सांसद चुने गए सचिन संसद के सबसे युवा सदस्य बने थे. दूसरी बार वह 2009 में अजमेर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए थे.
सचिन का जन्म 7 सितंबर, 1977 को हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की उपाधि हासिल की. उन्होंने बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में और फिर जनरल मोटर्स कॉरपोरेशन में काम किया. सचिन ने विमान उड़ाने के लिए ‘पायलट’ का अपना निजी लाइसेंस 1995 में अमेरिका से हासिल किया था. सचिन की शादी नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला की बेटी सारा से हुई थी. उनके दो बेटे भी हैं.
वहीं, राजस्थान में ‘राजनीति का जादूगर’ माने जाने वाले गहलोत सर्व स्वीकार्य नेता माने जाते हैं. जनाधार के साथ-साथ अनुभव भी मुख्यमंत्री की रेस में गहलोत को पायलट से कहीं आगे खड़ा करता है. पिछले कुछ समय से कांग्रेस के महासचिव (संगठन) का पदभार संभाल रहे गहलोत को जमीनी नेता और अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है. मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले गहलोत (67) 1998 से 2003 और 2008 से 2013 तक राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.
जानकारों का कहना है कि ‘मारवाड़ का गांधी’ माने जाने वाले गहलोत को राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लेकर आई थीं. बताया जाता है कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में शरणार्थियों के बीच अच्छा काम कर रहे थे और इंदिरा उनके काम से काफी प्रभावित थीं.
तीन मई, 1951 को जन्मे गहलोत ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत 1974 में एनएसयूआई के अध्यक्ष के रूप में की थी. वह 1979 तक इस पद पर रहे. गहलोत 1979 से 1982 तक कांग्रेस पार्टी के जोधपुर जिला अध्यक्ष रहे और 1982 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने. उसी दौरान 1980 में गहलोत सांसद बने. गहलोत ने सुनीता गहलोत से विवाह किया. उनके एक पुत्र और एक पुत्री है.
वहीं, कांग्रेस नेता सीपी जोशी भी सीएम पद की रेस में बताए जाते हैं. उन्होंने राजस्थान में कांग्रेस की जीत के लिए काफी मेहनत की है. साइकोलॉजी के प्रोफेसर रह चुके सीपी जोशी ने एकेडमिक्स छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया था. जोशी 1998 से 2003 के बीच राजस्थान में कैबिनेट मिनिस्टर रहे थे.
2008 के विधानसभा चुनाव के वक्त जोशी सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे. लेकिन सिर्फ एक वोट की वजह वे सीएम पद की रेस से बाहर हो गए थे. क्योंकि वे अपनी ही विधानसभा सीट सिर्फ एक वोट से हार गए थे. आपको बता दें कि जोशी का जन्म राजसमंद जिले के कुन्वारिया गांव में 29 जुलाई 1950 को हुआ था. उन्होंने फिजिक्स में मास्टर्स डिग्री पूरी की और फिर साइकोलॉजी से डॉक्टरेट किया. उन्होंने कानून की भी डिग्री ली है.
हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान एक बयान की वजह से जोशी का नाम विवादों में भी आया था. जोशी ने नाथद्वारा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि ब्राह्मण ही धर्म के बारे में बोल सकता है. उन्होंने पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती की जाति पर सवाल खड़े किए. बाद में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को डैमेज कंट्रोल करने के लिए आगे आना पड़ा और उन्होंने सफाई दी कि सीपी जोशी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है.