पश्चिम बंगाल की बांकुरा लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना के बाद चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुभाष सरकार ने जीत हासिल की है, उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार सुब्रत मुखर्जी को 174333 वोटों से हराया है.
बांकुरा पश्चिम बंगाल की एक महत्वपूर्ण संसदीय सीट है, जहां कभी सीपीएम की तूती बोलती थी. सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए बांकुरा में 2019 का चुनाव काफी अहम रहा.
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कब और कितनी हुई वोटिंग
बांकुरा सीट पर लोकसभा चुनाव के छठे चरण के तहत 12 मई को मतदान हुआ और चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 83.14 फीसदी मतदान हुआ. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां 82.23 फीसदी वोटिंग हुई थी.
कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार
बांकुरा लोकसभा सीट से कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे. भारतीय जनता पार्टी की ओर से डॉ. सुभाष सरकार और तृणमूल कांग्रेस की ओर से सुब्रत मुखर्जी चुनाव लड़े तो वहीं बहुजन समाज पार्टी ने महादेव बौड़ी, भारतीय न्याय-अधिकार रक्षा पार्टी से अनिमेश मल, राष्ट्रीय जनाधिकार सुरक्षा पार्टी से आनंद कुमार सरेन, झारखंड पीपुल्स पार्टी से गौर चंद्र हेंबराम और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) से डॉ. तन्मय मंडल चुनाव मैदान में उतरे.
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2014 का जनादेश
2009 के चुनाव में ही सांसद चुने गए. 2014 के चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुनमुन सेन ने कम्युनिस्टों का किला ध्वस्त करते हुए बांकुरा सीट पर जीत हासिल की. उन्होंने सीपीएम के आचार्य बसुदेव को हराया था. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां 82.23 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को 39.1 फीसदी, सीपीएम को 31.4 फीसदी, बीजेपी को 20.32 फीसदी और कांग्रेस को 1.78 फीसदी वोट मिले थे. 2009 की अपेक्षा पार्टी के वोट प्रतिशत में तकरीबन 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी.
सामाजिक ताना-बाना
बांकुरा संसदीय क्षेत्र पुरुलिया और बांकुरा जिले में आता है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की कुल आबादी 2128700 है. इसमें 88.74 फीसदी आबादी ग्रमीण है बाकी 11.26 फीसदी शहरी आबादी है. यहां अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात 29.12 और 17.17 है.
सीट का इतिहासबांकुरा संसदीय क्षेत्र 1951 के पहले ही बन गया था. बांकुरा हमेशा से सामान्य कैटेगरी की सीट रही है. 1952 में ही यहां 2 बार चुनाव हुए. पहली बार भारतीय कांग्रेस के पशुपति मंडल चुनाव जीते वहीं दूसरे चुनाव में कांग्रेस के जगन्नाथ कोली को सफलता मिली. 1957 में भी दो बार चुनाव कराने पड़े. पहली बार कांग्रेस के राम गति बनर्जी विजयी रहे. वहीं 1957 में जो दूसरा चुनाव हुआ उसमें कांग्रेस के पशुपति मंडल ने बाजी मारी.
1962 के चुनाव में कांग्रेस के राम गति बंदोपाध्याय चुनाव जीते. इसके बाद 1967 के चुनाव में सीपीआई केएम विश्वास चुनाव जीत गए उन्होंने कांग्रेस को हराया. 1971 के चुनाव में फिर कांग्रेस ने यहां से बाजी मारी और शंकर नारायण सिंह देव ने विजय हासिल की. 1977 के संसदीय चुनाव में बीएलडी के मंडल बिजॉय यहां से विजयी रहे.
1980 में सीपीएम ने इस सीट पर कब्जा कर लिया और आचार्य वासुदेव यहां से सांसद चुने गए. 1984 में जब पूरे देश में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की लहर चल रही थी तब भी बांकुरा से सीपीएम के आचार्य बासुदेव ही जीते. 1989, 1991,1998, 19999 और 2004, 2009 में सीपीएम के बसुदेव आचार्य बांकुरा से सांसद चुने जाते रहे. जबकि 2014 में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें हरा दिया.
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सना जैदी