गोहाना विधानसभाः 2014 में कांग्रेस का कब्जा, कभी न जीत पाई भाजपा

सन 1996 के चुनाव में गठबंधन सहयोगी रही एचवीपी उम्मीदवार के रूप में जगबीर सिंह की जीत को हटा दें तो बीजेपी यह सीट कभी जीत नहीं पाई.

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गोहना गोहना

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 12:12 AM IST

  • कांग्रेस के कब्जे में है सीट
  • 12 उम्मीदवार हैं मैदान में

हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अंतिम दौर में है. तीखी बयानबाजियों के बीच सियासी तपिश तेज हो गई है. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नजरें अपने उम्मीदवारों की जीती हुई सीटों को बरकरार रखते हुए विपक्षी दलों के खाते में गई सीटें जीतने पर हैं.

प्रदेश के सोनीपत जिले की छह में से केवल एक सीट जीत पाई बीजेपी कांग्रेस की पांच सीटों में सेंध लगाने की कोशिश में है. गोहना सीट भी उन पांच सीटों में से है, जहां 2014 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. 2009 में इस सीट से विधायक रहे कांग्रेस उम्मीदवार जगबीर सिंह मलिक ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के डॉक्टर कृष्ण को तीन हजार से अधिक वोटों के अंतर से मात देकर सीट बरकरार रखी थी.

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गोहना सीट का जिक्र हो और उस चुनाव का जिक्र न हो, जब जगबीर सिंह मलिक चुनाव हारते-हारते आखिरी राउंड की मतगणना में जीत गए थे. यह किस्सा है सन 1996 के विधानसभा चुनाव का. तब हरियाणा विकास पार्टी (एचवीपी) भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही थी. एचवीपी के अध्यक्ष थे जगबीर सिंह मलिक.

जब अंतिम राउंड में जीते थे जगबीर

जगबीर सिंह मलिक खुद भी गोहना सीट से किस्मत आजमा रहे थे. यह उनका पहला ही चुनाव था. उनकी टक्कर थी समता पार्टी के उम्मीदवार किशन सिंह से. 13 राउंड तक किशन सिंह ने लगातार बढ़त बनाए रखी, लेकिन 14 राउंड में बाजी पलट गई और जगबीर ने उन्हें पटखनी दे दी. जगबीर हारते- हारते यह चुनाव 872 वोट के करीबी अंतर से जीत गए थे.

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कभी जीत नहीं पाई बीजेपी

सन 1996 के चुनाव में गठबंधन सहयोगी रही एचवीपी उम्मीदवार के रूप में जगबीर सिंह की जीत को हटा दें तो बीजेपी यह सीट कभी जीत नहीं पाई. 1967 के पहले चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के आर धारी विधायक चुने गए थे. 1977 के चुनाव में निर्दल उम्मीदवार गंगा राम, तो 1982 में लोकदल के किताब सिंह ने चुनावी बाजी जीती. 1987 के चुनाव में किशन सिंह ने जीत हासिल कर लोकदल का कब्जा बरकरार रखा. 1991 के चुनाव में बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे किताब सिंह विजयी रहे.

सन 2000 से कांग्रेस के कब्जे में है सीट

सन 2000 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने पहली बार विजय पाई. कांग्रेस उम्मीदवार राम कुवर ने विजयश्री पाई. इसके बाद तो यह सीट मानों कांग्रेस का गढ़ बन गई. पार्टी का कब्जा 2014 तक बरकरार रहा. 2005 में कांग्रेस के धरम पाल सिंह मलिक विधायक चुने गए. बाद में कांग्रेस का हाथ थामने वाले जगबीर सिंह मलिक ने भी 2009 और 2014 में पार्टी की जीत का सिलसिला बरकरार रखा.

ये हैं मैदान में

गोहना सीट से कुल 12 उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में हैं. इस सीट से पहली जीत की तलाश में जुटी सत्ताधारी बीजेपी ने तीर्थ राणा पर दांव लगाया है. आईएनएलडी से ओमप्रकाश, जननायक जनता पार्टी से कुलदीप मलिक और बसपा से धर्मबीर मैदान में हैं.

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