गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में जूनागढ़ जिले की केशोद विधानसभा सीट पर सियासी पारा हाई है. केशोद विधानसभा सीट पर करीब 2.25 लाख मतदाता है. केशोद शहर कला, शिक्षा, सुविधाओं और संस्कृति के मामले में बहुत तेजी से विकसित हो रहा है. तालुका में मूंगफली उत्पादन, बुनाई मिल और तेल मिल प्रमुख उद्योग हैं, आइए अब आपको आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से इसके सियासी समीकरण के बारे में बताते हैं.
केशोद विधानसभा सीट पर पिछले 30 साल से कोली, पाटीदार, अहीर, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाता अहम तौर पर उभरे हैं. केशोद विधानसभा सीट पर कोली, लेउवा और कदवा पाटीदार, मसोया और सोरठिया, अहीर, दलित, अल्पसंख्यक, महिया, काठी, हाटी और राजपूत के साथ-साथ मेहर, लोहाना, सिंधी और ब्राह्मण मतदाता भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं. साल 1975 से 2012 तक केशोद विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी.
केशोद विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. साल 1972 के बाद से परबत चावड़ा को छोड़कर कांग्रेस का एक भी उम्मीदवार यहां से चुनाव जीतने में सफल नहीं हुआ है.
केशोद विधानसभा सीट में केशोद शहर के साथ कई गांव आते हैं. यहां के मतदाताओं की आय और रोजगार ज्यादातर कृषि से जुड़ा है. इसको लेकर इस क्षेत्र के मतदाता कृषि से संबंधित कुछ ठोस योजनाओं की मांग कर रहे हैं. जिससे कृषि उत्पादों का बाजार में उचित मूल्य मिले. साथ ही अगर कोई कृषि उद्योग आता है तो इस क्षेत्र को ज्यादा फायदा हो सकता है.
अब पिछले चुनाव के परिणामों पर विस्तार से नजर डालते हैं. केशोद विधानसभा सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी देवाभाई मालम ने बड़ी जीत दर्ज की थी. उन्हें 70 हजार से अधिक वोट मिले थे. उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के जयेश लाडाणी को 60 हजार वोट मिले थे. सीट पर पाटीदार आंदोलन का असर होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने कोली समुदाय से उम्मीदवार उतारा था. वहीं, कांग्रेस ने पाटीदार समुदाय के उम्मीदवार को मैदान में उतारा था. साल 2012 में बीजेपी के अरविंद भाई ने जीत दर्ज की थी.
दिग्विजय पाठक