बंगाल चुनाव में ट्विस्ट तब आ गया है जब भाजपा ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए एक नहीं, दो नहीं बल्कि चार सांसद उतार दिए हैं. एकतरफ टीएमसी कह रही है कि भाजपा के पास चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार नहीं हैं तो दूसरी तरफ भाजपा पहले से ही हिसाब लगाकर चल रही है कि कैसे भी अगर वह बहुमत के आंकड़े के आसपास भी पहुंच गई, तो उसके बाद गुणा-गणित लगाकर सरकार बनाना बड़ी बात नहीं है. इसलिए पार्टी बंगाल चुनाव में सरकार बनाने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत लगा रही है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा के तीसरे और चौथे चरण के लिए जारी बीजेपी की लिस्ट में चार वर्तमान सांसदों के नाम देख सभी चौंक गए. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने व्यंग कसा कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के पास पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए चेहरे ही नहीं हैं, इसी वजह से सांसदों को खड़ा किया गया है.
पार्थ चट्टोपाध्याय ने भी आरोप लगाया है कि बीजेपी के पास चेहरे नहीं हैं, इसी वजह से सांसदों को मैदान में उतारा गया है. वहीं कमरहट्टी से टीएमसी उम्मीदवार मदन मित्रा ने बाबुल सुप्रियो को पदयात्रा की चुनौती देते हुए कहा है कि देखें कि लोग किसके साथ ज्यादा सेल्फी खींचते हैं.
अमित शाह बोले- ये सांसदों का अधिकार है
इन आरोपों के जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सांसदों का अधिकार है कि वे कहीं से भी खड़े हों, ममता को यह चैलेंज स्वीकार करना चाहिए. वहीं बाबुल सुप्रियो का कहना है कि आसनसोल और कोलकाता के टॉलीगंज की जिम्मेदारी वे सहर्ष स्वीकार करते हैं. लॉकेट चटर्जी से भी जब हमने इस बारे में पूछा कि क्या आपका सांसद पद चुनावी दांवपेंच के भेंट चढ़ाया जा रहा है तो उन्होंने कहा कि पार्टी जो कहेगी हम वह करेंगे.
बाबुल को टॉलीगंज से दिया गया टिकट, ये है वजह
देखा जाए तो इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो का रहा जो दो बार आसनसोल लोकसभा से चुने गए. लेकिन बाबुल को उनके लोकसभा क्षेत्र की किसी विधानसभा से ना लड़ा कर कोलकाता टॉलीगंज सीट से उम्मीदवार बनाया गया है.
बाबुल को टॉलीगंज से टिकट देने की वजह यही है कि कोलकाता तृणमूल कांग्रेस का गढ़ है. कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस को हराने के लिए बीजेपी को बड़ा चेहरा चाहिए था, जो उसके पास फिलहाल नहीं है. यही वजह है कि सब कुछ दांव पर खेलते हुए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को टॉलीगंज से खड़ा कर दिया है.
टॉलीगंज में उनका मुकाबला टीएमसी के मंत्री अरूप विश्वास से है. यह टीएमसी का गढ़ है. पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी को यहां लगभग 46% वोट मिले थे जबकि बीजेपी को सिर्फ 8% के आसपास वोट मिले थे और तीसरे स्थान पर आई थी.
बीजेपी ने इस वजह से लॉकेट को मैदान में उतारा
बीजेपी द्वारा सांसद लॉकेट चटर्जी को हुबली के चूचूरा से उम्मीदवार बनाया गया है. यह लॉकेट की लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. लॉकेट को इसलिए यहां खड़ा किया गया है क्योंकि इस सीट से बीजेपी के कई नेता लड़ने के लिए तैयार बैठे थे. इस आपसी झमेले को रोकने के लिए ही लॉकेट को खड़ा किया गया है.
अगर पिछले साल के विधानसभा चुनाव के नतीजों को हम देखें तो यहां पर टीएमसी ने 56% मतों से जीत दर्ज की थी और बीजेपी को महज 5% के आसपास वोट मिले थे. लेकिन बीजेपी ने 2019 का लोकसभा चुनाव हुगली से जीत लिया था.
राज्यसभा एमपी स्वपन दासगुप्ता पहली बार लड़ रहे चुनाव
वहीं कूचबिहार से सांसद निशित प्रमाणिक को भी उनकी ही लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीट दिनहाटा से टिकट दिया गया है. जबकि राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता के लिए यह पहला मौका है जब वह चुनाव लड़ेंगे और वह भी विधानसभा का. स्वपन दासगुप्ता को हुगली के तारकेश्वर से उम्मीदवार बनाया गया है क्योंकि यहां भी बीजेपी को कोई बढ़िया चेहरा नहीं मिल रहा था.
अनुपम मिश्रा