पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR से जुड़े मामलों में जान गंवाने वालों के लिए बड़ा ऐलान किया है. ममता ने कहा है कि वह खुद सुप्रीम कोर्ट जाकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगी. ममता ने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उनकी सरकार कानूनी रास्ता अपनाएगी और वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले की पैरवी करेंगी.
मुख्यमंत्री ने दिल्ली के एक नेता के उस बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें कहा गया था कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की लाभार्थी महिलाओं को चुनाव में बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा. ममता ने कहा कि इन महिलाओं को कमजोर समझना भारी भूल है, क्योंकि वही महिलाएं घर और रसोई दोनों संभालती हैं.
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि व्हाट्सऐप के ज़रिये लोगों को ‘गायब’ करने की कोशिश हो रही है, लेकिन जो ऐसा कर रहे हैं, वे खुद राजनीतिक रूप से खत्म हो जाएंगे.
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उन्होंने साफ कहा कि राज्य में न तो किसी वक्फ संपत्ति पर कब्जा होने दिया जाएगा और न ही किसी तरह का डिटेंशन कैंप बनने दिया जाएगा. ममता ने न्याय की लड़ाई को निर्णायक अंजाम तक ले जाने की बात कही.
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, 'मैं यहां किसी भी वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जा नहीं होने दूंगी. और यहां कोई डिटेंशन कैंप नहीं बनेगा, मिस्टर वैनिश कुमार और दुर्योधन और दुशासन, हम तुम्हें दिखाएंगे. न्याय का इंतजार करो.'
ममता बनर्जी ने कहा, 'जो लोग आज बंगालियों को अपमानित कर रहे हैं, उनके लिए मैं कोई अपशब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहती, लेकिन इतना कहूंगी कि वे बंगाल के लालची लोग हैं और उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा. वे बुज़ुर्गों को, यहां तक कि सौ साल से अधिक उम्र के लोगों को भी SIR के लिए बुला रहे हैं. क्या उन्हें यह साबित करना पड़ेगा कि वे भारतीय नागरिक हैं.'
उन्होंने कहा, 'हम निश्चित रूप से SIR में अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश करेंगे, लेकिन इसमें 2 से 3 साल लग सकते हैं. अब तक 70 लोगों की जान जा चुकी है. जो बड़े लोग नाम हटा रहे हैं, क्या उन्होंने कभी जांच की कि उनके माता-पिता का नाम सूची में है या नहीं?'
अनुपम मिश्रा