उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. सरकार ने नई परीक्षा जल्द आयोजित करने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है जो परीक्षा में अनियमितताओं की आशंका जता रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और सभी चयन प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाए रखा जाएगा.
सरकार का कहना है कि ये फैसला भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है. सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग जल्द से जल्द निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से नई परीक्षा आयोजित कराए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'सरकार सभी भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी तथा सुचितापूर्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं.ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.'
लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मामला दर्ज
सरकार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि जांच में सामने आया कि परीक्षा में सॉल्वर गैंग, अवैध धन वसूली और प्रश्नपत्र लीक जैसे गंभीर अनियमितताएं हुई थीं. इस मामले की जानकारी यूपी एसटीएफ को पहले ही मिल चुकी थी. इस मामले में लखनऊ के विभूतिखंड थाने में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है.
तीन अभियुक्त गिरफ्तार
इस मामले में एसटीएफ की जांच में स्पष्ट संकेत मिला है कि परीक्षा की शुचिता भंग हुआ है. आरोप है कि फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई. एसटीएफ ने इस मामले में महबूब अली, वैभव पाल और विशाल पाल को गिरफ्तार किया है.
विज्ञप्ति में बताया गया है कि पूछताछ में अभियुक्त महबूब अली ने स्वीकार किया कि उसने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र निकाल लिए थे और उन्हें पैसे लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया. STF की विवेचना और डेटा एनालिसिस से इस स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई है.
जल्द घोषित होगी नई परीक्षा की तारीख
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री ने परीक्षा निरस्त करने के आदेश दिए हैं. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया गया है कि नई परीक्षा शीघ्र, पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपनीय जांच के निर्देश दिए थे. 20 अप्रैल 2025 को एसटीएफ ने फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया.
बता दें कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी, लेकिन गोपनीय जांच और डेटा एनालिसिस में धांधली की पुष्टि होने के बाद सरकार ने परीक्षा को निरस्त कर दिया है.
समर्थ श्रीवास्तव