चिलचिलाती गर्मी से गंगा सूखी, गहरे पानी के बीच रेत देख वैज्ञानिक परेशान

Ganga Reduces Water Flow: हर साल गर्मी की तीव्रता बढ़ती नजर आती है. पिछले साल के मुकाबले इस साल जून जैसी गर्मी मार्च में देखने को मिल रही है जिस कारण गंगा का पानी भी सूखता जा रहा है, यह देख वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है.

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Ganga River Dried Ganga River Dried

रोशन जायसवाल

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST
  • गर्मी का सितम गंगा पर पड़ा भारी
  • खेतों की सिचाई भी पानी कम होने का कारण

Ganga River Flow Reduces: गर्मी का सितम इस बार वक्त के पहले और कहीं ज्यादा पड़ने लगा है. जिसका असर इंसान तो इंसान प्रकृति पर भी दिखने लगा है. मार्च के महीने में ही मई-जून की गर्मी सारे रिकॉर्ड तोड़ती चली जा रही है, तो नदियों पर भी इसका दुष्प्रभाव दिखने लगा है और अभी से नदियां सूखने लगी हैं. वाराणसी में गंगा की ऐसी ही तस्वीर डराने वाली है. मई-जून की गर्मी के असर के चलते गंगा में रेत के टीले उभरा करते थें वे अभी मार्च के अंतिम में ही दिख जाने से वैज्ञानिकों के लिए चिंता का सबब बन चुके हैं.

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साल दर साल बढ़ता जा रहा तापमान

गर्मी की मार इस बार वक्त के पहले और कुछ ज्यादा ही प्रभावी दिखने लगी है. मई-जून की गर्मी की तरह आसमान से अंगारे बरसने लगे हैं तो लू जैसे थपेड़े भी लोग झेलने को अभी से मजबूर हो चुके हैं. इंसान तो इंसान गर्मी का असर प्रकृति पर भी समय से पहले ही दिखने लगा है. वाराणसी में पारा 41 डिग्री तक पहुंच चुका है और गंगा भी अभी से ही सूखने लगी है. वाराणसी के रामनगर से सामने घाट गंगा के बीचों-बीच जो रेत के टीले मई-जून में पानी की कमी से उभरा करते थें वे अभी मार्च के अंत में ही दिखने लगे है. गंगा के अभी से सूखने से वैज्ञानिक आगाह कर रहें हैं और वजह के साथ उपाय भी बता रहें हैं.

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मई-जून में दिखने वाले टीले अप्रैल-मई में दिख

इस बारे में बीएचयू महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र के चेयमैन और गंगा विज्ञानी प्रो बीडी त्रिपाठी बताते हैं कि गंगा में लगातार पानी कम होता चला जा रहा है. जब गंगा में पानी का प्रवाह कम होता है तो सिल्ट्रेशन रेट बढ़ जाता है. जिसकी वजह से रेत के टीले जो मई-जून में दिखते थें, फिर अप्रैल मई में दिखने लगा तो आज मार्च में ही रेत के टीले गंगा में उभर गए हैं. प्रवाह कम होने से ऐसा हो रहा है. गंगा में प्रवाह कम होने का चार कारण है वैज्ञानिक आधार पर, पहला क्योंकि उत्तराखंड में हाईड्रोपावर जनरेशन के लिए कई बांध बना दिए गए हैं. दूसरा हरिद्वार के पास भीमगोड़ा कनाल से दूसरे प्रदेशों में पानी डायवर्ट कर दिया जा रहा है. 

लिफ्ट केनाल के जरिए भी हो रहा गंगा का पानी कम

तीसरा कारण है कि गंगा के दोनों तरफ लिफ्ट केनाल गंगा के पानी को खींचकर खेतों में सिंचाई के लिए दे रहें हैं. इससे मेन स्ट्रीम में पानी कम हो रहा है. चौथा कारण है कि कोई ऐसी पॉलिसी नहीं है कि गंगा से कोई कितना पानी उपयोग के लिए निकाल सकता है या नहीं? इसी वजह से गंगा का अधिक दोहन हो रहा है. जिससे ग्राउंड वाटर नीचे जा रहा है. उन्होंने बताया कि इसका दुष्प्रभाव यह होता है कि गंगा में प्रदूषण बढ़ता है. दूसरा जलीय जीवों के लिए खतरा बढ़ता है. इसके उपाय यह हैं कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग हो और प्रॉपर तकनीक इस्तेमाल किया जाए. 

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