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कैसे तय होता है हवा अच्छी है या खराब, ऐसे बनता है AQI

aajtak.in
  • 05 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:48 PM IST
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एयर क्वालिटी इंडेक्स वायु में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा देखी जाती है. जिसमें तय किया जाता है इनकी मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मापदंड से अधिक है या नहीं. 

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एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है

जैसे कि नाम से आप वाकिफ हो गए हैं ये इंडेक्स हवा की देता है. यह हवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देता है. इसमें बताया जाता है कि हवा में किन गैसों की कितनी मात्रा घुली हुई है. इस इंडेक्स में 6 कैटेगरी बनाई गई हैं.  

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ये हैं 6 कैटेगरी


1. अच्छी
2. संतोषजनक
3. थोड़ा प्रदूषित
4. खराब
5. बहुत खराब
6. गंभीर.

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एयर क्वालिटी इंडेक्स मुख्य रूप से 8 प्रदूषकों ((PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3, and Pb)) से मिलाकर बनाया जाता है.  इस में वायु प्रदूषण का मतलब है हवा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय किए गए मापदंड से अधिक है.

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दिल्ली  में वायु प्रदूषण की समस्या को भयंकर बनाने में मुख्य भूमिका हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 कणों की होती है. जिस वजह से इन कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन होने लगती है. वहीं हवा में मौजूद इन कणों का मतलब है कि दिल्लीवाले रोजाना 21 सिगरेट के बराबर धुआं निगल रहे हैं.

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दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुख्य कारण

हवा के बहाव में कमी आना, दिवाली के अवसर पर बम- पटाखे फोड़ना, हरियाणा और पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलना, वाहनों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि आना, पेड़ों का अधिक मात्रा में कटाव,  साथ ही ग्‍लोबल वार्मिंग बढ़ना आदि.

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