पिछले साल जून के महीने में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने जनता दरबार के दौरान एक महिला टीचर उत्तरा बहुगुणा पंत ने अपने ट्रांसफर की मांग रखी थी. जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था. आज वह फिर से चर्चा में आ गई हैं.
दरअसल उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वह अपने सिर पानी से भरा मटका लेकर जा रही हैं. वीडियो वायरल होने के बाद फिर से वह फिर से खबरों में आ गईं.
बता दें, स्कूल के छात्रों के लिए बहुगुणा पानी लेकर जा रही हैं. उन्होंने कहा स्कूल में पीने और खाना बनाने के लिए पानी नहीं था. जिसके बाद उन्होंने पानी लाने का फैसला किया.
वर्तमान में बहुगुणा की पोस्टिंग उत्तरकाशी जिले के नौगांव के एक सरकारी स्कूल में हैं.
बता दें, वीडियो मे बहुगुणा ने कहा कि "हमारे 'भजन माता' (स्कूल के रसोइए) के हाथ फ्रैक्चर हो गया है. इसलिए वह पानी भरकर नहीं ला सकती. वहीं पहाड़ी रास्ते से पानी लाना आसान नहीं होता. लेकिन बच्चों के लिए बहुगुणा बिना किसी दिक्कत के पानी भरकर लाईं.
उन्होंने वीडियो में कहा कि पानी लाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है. वहीं पानी की पाइपलाइन चोरी हो गई है. ऐसे में काफी दूर से पानी लाना पड़ता है. इस तरह पानी लाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा बच्चों को कभी बिना भोजन कराए नहीं जाने देते हैं. स्कूल में पीने और खाना बनाने के लिए पानी नहीं था जिस वजह से उन्हें खुद ही पानी लाना पड़ा.
25 साल से सिस्टम से लड़ रही हैं
बहुगुणा उत्तरकाशी जिले के नौगांव के सरकारी स्कूल में पिछले 25 साल से सेवा दे रही हैं. उन्होंने अपने स्थानांतरण के लिए सीएम के सामने जनता दरबार में मांग रखी थी, जिसके बाद बहगुणा को निलंबित कर दिया गया और उन्हें विभागीय जांच का भी सामना करना पड़ा था.
जिसके बाद उन्होंने मार्च 2019 में उसी स्कूल को दोबारा ज्वॉइन किया. इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने विभागीय जांच का सामना किया और उस दौरान उन्हें वेतन भी नहीं मिला.
आपको बता दें, टीचर से मुख्यमंत्री से कहा था कि 'वह लंबे समय से पहाड़ियों में अपनी सेवाएं दे रही हूं. अब मैं चाहती हूं कि मेरा ट्रांसफर मैदानी इलाकों में किया जाए. बहुगुणा का कहना था कि वह अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हैं. उन्होंने बताया मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है और अब वह देहरादून में अपने बच्चों को अनाथ नहीं छोड़ सकतीं.
उन्होंने कहा था ''मेरी स्थिति ऐसी है कि न मैं बच्चों को अकेला छोड़ सकती हूं और न ही नौकरी छोड़ सकती हूं'. जिसके बाद वह अपने ट्रांसफर के चक्कर में वह वर्षों से चक्कर काट रही हैं. लेकिन उनकी नहीं सुनी गई.