ये कोई पहली बार नहीं है जब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) विवादों में फंसा है. भारत के अलावा कई अन्य देश हैं जहां ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं आपको बता दें, कुछ ऐसे देश भी हैं जहां ईवीएम बैन है. इनमें इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और अमेरीका शामिल हैं. वहीं ब्राजील, फिलिपिंस, भूटान, नेपाल, नामिबिया जैसे बड़े लोकतंत्र में ईवीएम मशीन के जरिए ही मतदान होते हैं.
इसमें नीदरलैंड, इटली में ईवीएम पर बैन लगा दिया गया है. जबकि जर्मनी,
इंग्लैंड और फ्रांस में कभी ईवीएम का इस्तेमाल नहीं हुआ. वहीं अमेरिका देश
के कई राज्यों में बिना पेपर ट्रेल वाली ईवीएम पर बैन है.
नीदरलैंड में साल 2006 में ईवीएम पर बैन लगा दिया गया. साल 2009 में
रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड ने ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी. इसके बाद इटली
ने भी इस पर रोक लगा दी. मार्च 2009 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ जर्मनी ने ईवीएम
के जरिए वोटिंग को अवैध करार दिया.
पहले भारत में बैलट पेपर से चुनाव आयोजित किए जाते थे, लेकिन यह
प्रक्रिया धीमी, पर्यावरण के अनुकूल और महंगी होने के कारण निर्वाचन कमीशन
ने इसे ईवीएम से री-प्लेस कर दिया. बाद में धीरे-धीरे ईवीएम को चुनावों में
इस्तेमाल किया जाने लगा.
सबसे पहले 1982 में केरल के परुर असेंबली चुनाव में पहली बार ईवीएम का
इस्तेमाल किया गया था. इसके बाद 1999 में लोकसभा चुनावों के दौरान ईवीएम का
कुछ-कुछ जगहों पर इस्तेमाल किया गया. साल 2004 में लोकसभा और स्टेट
असेंबली चुनावों में ईवीएम का पूरी तरह से इस्तेमाल किया गया.
एक एस्टिमेट के अनुसार 31 देशों में ईवीएम पर स्टडी करने के बाद पता चला कि इनमें केवल 4 ही ऐसे देश हैं जहां ईवीएम का पूरा इस्तेमाल किया जाता है. 11 देशों में ईवीएम का इस्तेमाल कुछ ही हिस्सों और छोटे इलेक्शंस के लिए किया जाता है. 5 देशों में ईवीएम का प्रयोग पायलट बेसिस पर किया जाता है. 3 देशों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है और 11 देश जहां ईवीएम का इस्तेमाल पायलट बेसिस पर किया जाता है वहां भी ईवीएम को बंद करने पर विचार किया जा रहा है.
भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर सरकार और विपक्षी दलों में विवादों का सिलसिला जारी है. ईवीएम से पहले भारत में बैलट पेपर के जरिए चुनाव किए जाते थे. लेकिन बैलट पेपर की धीमी प्रक्रिया के कारण मतदान के लिए ईवीएम का इस्तेमाल शुरू किया गया.