तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर 185 उम्मीदवार चुनावी
मैदान में हैं और उम्मीदवार की संख्या अधिक होने की वजह से यहां चुनाव
बैलेट पेपर से करवाए जाएंगे. ऐसा बहुत कम होता है जब एक सीट से इतने
उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हो. लेकिन इतिहास में एक ऐसा चुनाव भी हुआ है, जब
एक सीट पर हजार से भी ज्यादा उम्मीदवार दावेदारी प्रस्तुत कर रहे थे. जानते
हैं उस दौरान कैसा महौल था और कैसे यहां चुनाव करवाए गए थे...
यह बात है साल 1996 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव
की. प्रदेश की अन्य सीटों की तरह मोडाकुरीची सीट पर चुनाव हो रहे थे, लेकिन
यहां चुनावी मैदान में 30-40 नहीं, बल्कि 1033 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा
रहे थे. यह सीट प्रदेश के इरोड जिले के अंतर्गत आती है.
(Photo: reuters)
चुनावी मैदान में हजार से ज्यादा उम्मीदवार होने की वजह से चुनाव आयोग को बैलेट बॉक्स से नहीं बल्कि बैलेट बुक छपवानी पड़ी थी और हर बैलेट बुक में सभी उम्मीदवारों के नाम लिखे गए थे, जिसमें मतदाता को नाम खोजने में काफी मुश्किल हुई.
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बता दें कि चुनाव आयोग हर एक मतदाता के लिए वोटिंग की व्यवस्था करता है और कितने भी उम्मीदवार हो उनके लिए भी चुनाव आयोग व्यवस्था करता है. इस दौरान भी चुनाव आयोग की ओर से वोटिंग करवाई गई. हालांकि आयोग ने चुनाव की तारीख को आगे बढ़ा दिया था और जमानत राशि में बढ़ोतरी कर दी थी.
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इतने लोगों ने क्यों की थी दावेदारी?
फेडरेशन ऑफ फार्मर्स एसोशिएसन नाम की संस्था के एक विरोध की वजह से इतने लोगों ने चुनाव लड़ने का फैसला किया था.
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इस संस्था से जुड़े लोगों ने ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवारी करने का फैसला किया था, ताकि सरकार का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो सके.
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हिंदू अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां करीब 1000 किसानों ने नेताओं के साथ पर्चे दाखिल कर दिए. उस वक्त गैर आरक्षित सीटों पर 250 रुपये और एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर 125 रुपये की जमानत राशि देनी पड़ती थी.
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