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लोकसभा में ऐसे तय होता है, कौन- कहां बैठेगा, ये है फॉर्मूला

aajtak.in
  • 05 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST
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लोकसभा संसद का निम्न सदन है. भारतीय संसद में तीन सत्र होते हैं- शीत कालीन सत्र, बजट सत्र और मॉनसून सत्र. लेकिन क्या आप जानते हैं लोकसभा में किसी भी सत्र की शुरुआत से पहले ये कैसे तय किया जाता है कि कौन सा सांसद कहां बैठेगा? आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

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भारत की संसद के तीन अंग है जो 1 . राष्ट्रपति 2 .लोकसभा 3 .राज्य सभा है. बता दें, लोकसभा को  'House of the People' भी कहा जाता है. संसद की पूरी प्रणाली संसदीय नियम के अनुसार चलती है. जहां स्पीकर के सामने लोकसभा में मौजूद सांसद अपनी, राय, सवाल आदि करते हैं.

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आपने देखा होगा कि लोकसभा में बहस के दौरान विभिन्न दलों के सभी सांसद लाइन से बैठे रहते हैं. लोकसभा के इन सदस्यों के बैठने के भी नियम होते हैं, कि कौन कहां बैठेगा. बता दें, इस बात का निर्णय करने का अधिकार लोकसभा स्पीकर के पास होता है.

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भारतीय संविधान के अनुसार सदन में सांसदों की संख्या अधिकतम 552 तक हो सकती है जिनमें से 530 सदस्य अलग-अलग राज्यों से होते हैं और 20 सदस्य तक भारत के केंद्र शासित प्रदेशों से हो सकते हैं इसके अलावा 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित निर्धारित की गई है. वर्तमान में सदन की संख्या 545 है.

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आपको बता दें, लोकसभा चैम्बर में सीटों की संख्या 550 है. सीटों को 6 ब्लॉक में बांटा गया है. प्रत्येक ब्लॉक में 11 पंक्तियां हैं.

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स्पीकर के दायीं ओर (सीधी ओर) ब्लॉक नंबर 1 और बायीं ओर (उल्टे ओर) जो पंक्तियां हैं उनमें 97-97 सीटें हैं और बाकी के बचे 4 बलॉक्स में 89-89 सीटें हैं.

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वहीं 1 सीट लोकसभा के प्रत्येक सदस्य और मंत्री को दी जाती है.

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कौन करता है बैठने की व्यवस्था का फैसला:- "Rules of Procedure and Conduct of Business" के नियम 4 के मुताबिक लोकसभा स्पीकर तय करता है कि कौन कहां बैठेगा.

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स्पीकर किसी भी पार्टी की लोकसभा में सीटों के आधार उनके बैठने की जगह तय कर सकते हैं.

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कैसे बांटी जाती हैं सीटें: जिस पार्टी के पास 5 या उससे ज्यादा सीटें हैं उनके लिए निम्न फ़ॉर्मूले के आधार पर सीटों का बांटा जाता है. जो इस प्रकार है:- पार्टी या गठबंधन के पास सीटों की संख्या को उस पंक्ति में कुल सीटों की संख्या से मल्टीप्लाई करेंगे. फिर जो भी संख्या आएगी उन्हें लोकसभा सीटों की कुल संख्या से भाग दे देंगे.

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कैसे होगा बाकी सीटों का बंटवारा-
जो फॉर्मूला ऊपर दिया गया है उसी के आधार पर सीटों का बंटवारा किया जाता है. बता दें, लोकसभा स्पीकर की अनुमति के बाद ही सीटें दी जाती है.  वहीं आपको बता दें. जिन पार्टी के पास 5 से कम सदस्य होते हैं लोकसभा स्पीकर उनके लिए सीटों का बंटवारा अपनी इच्छा के अनुसार कर सकता है. स्पीकर किसी सदस्य की वरिष्ठता और सामाजिक सम्मान को देखते हुए संसद के किसी सदस्य को फ्रंट सीट उपलब्ध करवा सकता है.

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