20 साल पहले करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान आर्मी के कब्जे में आए भारतीय पायलट के. नचिकेता को एक हफ्ते बाद ही रिहा कर भारत भेज दिया गया था. बता दें, आज पाकिस्तान सेना ने कहा कि उनकी गिरफ्त में 1 भारतीय पायलट है. इससे पहले उन्होंने 2 भारतीय पायलट की गिरफ्तारी की बात कही थी. वहीं भारतीय वायुसेना ने इस बात की पृष्टि की है कि भारत का 1 पायलट लापता है. ऐसे में जानते हैं कैसे 20 साल पहले पाकिस्तान के चंगुल से IAF कैप्टन नचिकेता को रिहाई मिली थी और वह स्वदेश लौटे थे. साथ ही जानें- क्या है युद्ध बंदियों के लिए नियम.
नचिकेता ऐसे लगे पाकिस्तान आर्मी के हाथ: 3 जून 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान IAF के फाइटर पायलट के नचिकेता को 'ऑपरेशन सफेद सागर' में MIG 27 उड़ाने का काम सौंपा गया था. जहां उन्होंने 17 हजार फुट से रॉकेट दागे लेकिन इसी बीच उनके प्लेन के इंजन में खराबी हो गई और MIG 27 क्रैश हो गया. जिसके बाद पाकिस्तान आर्मी ने उन्हें अपनी कैद में ले लिया.
मारा-पीटा और किया टॉर्चर: पाकिस्तान आर्मी के जवान नचिकेता को मानसिक और शारीरिक रूप से टॉर्चर करते थे. उन्हें मारते-पीटते थे. नचिकेता ने बताया कि वह मुझे बुरी तरह से पीटते थे. साथ ही उनकी कोशिश रहती थी कि भारतीय सेना के बारे में जानकारी दूं.
इस व्यक्ति ने कराई थी नचिकेता की रिहाई: रिपोर्ट के अनुसार नचिकेता की रिहाई में पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जी पार्थसारथी का हाथ था उन्होंने ही रिहाई की बातचीत की थी.
(जी पार्थसारथी: फोटो- ट्विटर)
पार्थसारथी ने बताया कि "मुझे विदेशी कार्यालय से फोन आया और उसने कहा कि मैं वहां से अपने पायलट को लेकर आऊं". क्योंकि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने नचिकेता की रिहाई का ऐलान कर दिया था. उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय का दफ्तर जिन्ना रोड पर था जहां पर प्रेस क्रॉन्फ्रेस हो रही थी. लेकिन वहां जाने के लिए मैंने साफ इनकार कर दिया. (फोटो: नवाज शरीफ, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री)
उन्होंने बताया कि उस समय पाकिस्तान शोर मचाकर बताना चाह रहा था कि वह बड़ा दिल दिखाकर नचिकेता की रिहाई कर रहा है.
पार्थसारथी ने कहा कि - "मैंने विदेश मंत्रालय के कार्यालय में जाने से सीधे तौर पर इनकार कर दिया और स्पष्ट रूप से कहा कि मैं भारतीय वायु सेना के पायलट का मजाक बनाने के लिए आपके लिए विदेशी कार्यालय में नहीं जाऊंगा". मेरे इन शब्दों से उन्हें काफी झटका लगा.
ये है युद्ध बंदियों के लिए नियम: जिनेवा संधि के मुताबिक, किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता. साथ ही युद्धबंदी को किसी भी तरह से डराया-धमकाया और उस पर किसी भी तरह का दवाब नहीं बनाया जा सकता.
जिनेवा संधि के अनुसार पायलट को भारत को सौंपने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की थी. आपको बता दें, युद्धबंदियों (POW) के अधिकारों को बरकरार रखने के जिनेवा समझौता (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं.
इस नियम के तहत अगर कोई सैनिक घायल रूप में पकड़ा जाता है तो उसकी उचित देखरेख की जाती है. साथ उन्हें जरूरत का सामान, खाना-पीना आदि दिया जाता है. साथ ही पकड़े गए सैनिकों पर या तो मुकदमा चलाया जाएगा या फिर किसी भी युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाएगा.
वहीं नियम के अनुसार पाकिस्तान की गिरफ्त में आए नचिकेता को 8 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया था. जहां पाकिस्तान से नचिकेता को भारत को सौंप दिया था. जिसके बाद वह वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे. जहां तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायण और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनका स्वागत किया.
वहीं आपको बता दें, 20 साल बाद वैसी ही स्थिति सामने आई है जहां पाकिस्तान सरकार ने पहले दावा किया था कि उन्होंने दो भारतीय पायलट को जिंदा पकड़ा है. जिसमें से एक घायल है और इलाज चल रहा. लेकिन अब पाकिस्तान आर्मी का सफेद झूठ सामने आया है जहां उन्होंने कहा कि हमारी गिरफ्त में सिर्फ एक पायलट है. हालांकि भारतीय सेना ने एक पायलट के लापता होने की बात स्वीकार की है.
(फोटो: पाक सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर)
भारत ने पाकिस्तान को दी चेतावनी: पाकिस्तान ने भारतीय पायलट का मारपीट और अभद्रता का वीडियो जारी कर जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है. जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान को खबरदार करते हुए कहा कि किसी भी हालत में भारत के पायलट को किसी किस्म का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. आपको बता दें, पाकिस्तान की गिरफ्त में पायलट का नाम विंग कमांडर अभिनंदन हैं. भारत उनकी जल्द वापसी की उम्मीद कर रहा है.
(विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेस)