आपने अक्सर देखा होगा कि स्कूल की बस का रंग हमेशा पीला ही होता है. वहीं स्कूल बस के पीले होने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण और सुरक्षा कारण हैं, जिसकी वजह से इसका रंग पीला ही होता है. आइए जानते हैं आखिर स्कूल की बसों का रंग हमेशा पीला ही क्यों होता है...
दरअसल स्कूल की बसों का रंग सुरक्षा की दृष्टि से पीला रखा जाता है. माना जाता है कि पीला रंग होने से बस दूर से देखी जा सकती है. साथ ही ये बस बारिश, रात, दिन, कोहरे में आसानी से दिखाई दे जाती है, इसलिए दुर्घटना का खतरा बहुत कम होता है.
1930 में अमेरिका में की गई एक रिसर्च में पुष्टि हुई है कि पीला रंग आंखों को सबसे जल्दी दिखाई देता है. सभी रंगों में से किसी भी आदमी का ध्यान सबसे पहले जाता है.
इसके पीछे की वजह है कि बाकी रंगों की तुलना में पीले रंग में 1.24 गुना ज्यादा आकर्षण होता है और अन्य किसी भी रंग की तुलना में ये आंखों को जल्दी दिखाई देता है.
सफेद लाइट के विभिन्न घटकों के बीच लाल रंग में अधिकतम तरंग दैर्ध्य (wavelength लगभग 650 nm) होती है और इसलिए आसानी से ये बिखरती (scattered) नहीं हैं और दूर से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है.
बता दें कि अगर आदमी सीधा भी नहीं देख रहा हो तो, वो आसानी से पीली बस को देख सकता है. इसलिए स्कूली बस को पीले रंग में रंग दिया जाता है.
सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी स्कूली बसों को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं. जिसके अनुसार स्कूल बस के आगे और पीछे "School Bus" लिखा होना आवश्यक है. अगर किराए पर स्कूल बस है तो उस पर स्कूल बस ड्यूटी लिखना आवश्यक है.
बस में एक फर्स्ट एड बॉक्स होना आवश्यक है. बस की खिड़कियों के बीच में ग्रिल लगी होनी चाहिए. साथ ही स्कूल से जुड़ी हर जानकारी बस पर होनी चाहिए. सीट में बैग रखने के लिए जगह होनी चाहिए. बच्चों के लिए एक अटेंडेंट होना चाहिए. वहीं स्कूल बस को 40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तेज नहीं चलाया जा सकता.
साथ ही अगर बच्चे 12 साल से छोटे हैं तो वाहन में सीट से 1.5 ज्यादा बच्चे बैठा सकते हैं, जबकि 12 साल से अधिक उम्र के बच्चे होने पर एक बच्चे को पूरी सीट दी जानी आवश्यक है.