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यहां हर 6 महीने में बदल जाती है राज्य की राजधानी, ये है वजह

प्रियंका शर्मा
  • 15 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में कई ऐसे कानून हैं, जो भारत के अन्य हिस्सों से अलग है. कश्मीर का अलग संविधान इसे अन्य राज्यों से अलग बनाता है. आपने कश्मीर में संपत्ति ना खरीदने पाने के कानून के बारे में तो बहुत कुछ सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं जम्मू-कश्मीर में राजधानी भी हर 6 महीने से बदल जाती है.


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दरअसल जम्मू-कश्मीर में हर 6 महीने से सचिवालय के कार्य का स्थान बदल जाता है. गर्मियों में राजधानी जम्मू से श्रीनगर चली जाती है और 6 महीनों के बाद सर्दियों की आहट के साथ ही यह जम्मू आ जाती है. वहीं हाल ही में यह प्रक्रिया पूरी हुई है.

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राज्य में इस प्रक्रिया को 'दरबार मूव' के नाम से जाना जाता है. जम्मू-कश्मीर में अंग्रेजों के समय से चली आ रही राजधानी बदलने की प्रथा को फिलहाल समाप्त नहीं किया गया है.

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बता दें कि राजधानी बदलने की यह परंपरा 1862 में डोगरा शासक गुलाब सिंह ने शुरू की थी. गुलाब सिंह महाराजा हरि सिंह के वंशज थे, जिनके समय ही जम्मू-कश्मीर भारत का अंग बना था. सर्दी अधिक होने की वजह से गुलाब सिंह ने गर्मी के दिनों में श्रीनगर और सर्दी में जम्मू को राजधानी बनाना शुरू कर दिया.

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राजधानी शिफ्ट करने की यह प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है, इस वजह से इसका विरोध भी होता रहा है. एक बार राजधानी शिफ्ट होने में करोड़ों रुपये खर्च होता है.

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राजधानी बदलने पर सचिवालय सहित अन्य प्रमुख कार्यालयों में कार्य करने वाले दरबार मूव कर्मचारियों को टीए भत्ते के तौर पैसे दिए जाते हैं. ये कर्मचारी परिवार सहित आते हैं. करीब 75 हजार दैनिक वेतन भोगियों को जम्मू और श्रीनगर में अलग-अलग रखा जाता है.


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राजधानी बदलने पर सर्दियों में नवंबर के पहले या दूसरे हफ्ते से जम्मू में काम शुरू हो जाता है. वहीं अप्रेल के बाद श्रीनगर में काम शुरू किया जाता है. सैकड़ों ट्रकों से ऑफिसों के फर्नीचर, फाइल, कंप्यूटर और अन्य रेकॉर्ड्स को शिफ्ट किया जाता है.

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