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ARTS में भी आते हैं नंबर, रक्षा गोपाल ने किया साबित, हैं Career Option

aajtak.in
  • 30 मई 2017,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST
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अगर आप ARTS स्ट्रीम से हैं तो हताश ना हों. जरूरी नहीं है कि सपनो को उड़ान इंजीनयर या डॉक्टर बनकर ही दी जाये. आज के बदलते परिवेश में कई ऐसे ARTS के कोर्सेज मौजूद हैं जो आपको समाज में इज्जत और अच्छी नौकरी दिला सकते हैं. CBSE 12वीं में All India Topper रक्षा गोपाल ने यह तो साबित कर दिखाया कि आर्ट्स में भी नंबर लाया जा सकता है और करियर के रूप में अपनाया जा सकता है. रक्षा सिर्फ 2 नंबर से 100 फीसदी अंक पाने से चूक गईं. रक्षा अब आगे पोलिटिकल साइंस की पढ़ाई करेंगी. करियर कंसल्टेंट आशीष आदर्श आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे कोर्सेज के बारे में, जो ARTS स्ट्रीम वाले छात्रों के लिए करियर के बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं.

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LAW: आर्ट्स से बारहवीं के बाद छात्रों का एक बड़ा तबका लॉ के क्षेत्र में जाता है. 10+2 आर्ट्स के बाद 5 वर्षीय लॉ इंटिग्रेटेड पाठ्यक्रम पूरा कर कानून के क्षेत्र में करियर को एक नयी दिशा दी जा सकती है. पहले इस इंटिग्रेटेड पाठ्यक्रम में केवल बीएएलएलबी पाठ्यक्रम ही होता था,लेकिन समय की मांग को देखते हुए बीबीएएलएलबी, बीएससीएलएलबी और बीकॉमएलएलबी पाठ्यक्रमों की भी घोषणा कर दी गयी है.

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BANKING: अगर आप बैंकिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो आपको ये जान के खुशी होगी की अगले कुछ वर्षों में लगभग 1 लाख से अधिक छात्रों के लिए बैंकिंग सेक्टर के दरवाज़े खुले रहेंगे. यदि आप 10+2 के बाद इस क्षेत्र में प्रवेश करना चाहते हैं, तो क्लर्क लेवल के लिए आवेदन करें. अगर प्रोबेशनरी ऑफिसर बनना चाहते हैं तो आर्ट्स से ग्रेजुएशन करें और प्रवेश परीक्षा में बैठने की रणनीति बनायें. बैंकों की रिक्तियों की अधिसूचना निरंतर अखबारों व रोज़गार समाचार में निकलती रहती हैं.

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BUSINESS MANAGEMENT: भारत की बढती अर्थव्यवस्था और बिजनेस मैनेजरों की भारी मांग ने युवाओं के लिए करियर के द्वार खोल दिए हैं. 10+2 आर्ट्स के बाद 3 वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम आपको बिजनेस मैनेजमेंट की दुनिया में प्रवेश दिला सकता है. कहीं इसे बीबीए यानी बैचलर इन बिजनेस ऐडमिनीस्ट्रेशन कहा जाता है, तो कहीं इसे बीबीएम यानी बैचलर इन बिजनेस मैनेजमेंट कहा जाता है.

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JOURNALISM: इलेक्ट्रोनिक मिडिया की चकाचौंध ने युवाओं के एक बड़े वर्ग का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. 10+2 आर्ट्स के बाद 3 वर्षीय बैचलर्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन या बीए (जेएमसी) जैसा पाठ्यक्रम आपको मिडिया के क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर दे सकता है. इस क्षेत्र में सफलता के लिए आपकी भाषा पर मजबूत पकड़ बेहद जरुरी है, चाहे बात प्रिंट मिडिया की हो या इलेक्ट्रोनिक मिडिया की.

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COMPUTER SCIENCE: एक समय था जब केवल गणित के छात्र ही इस क्षेत्र मेंप्रवेश करते थे. लेकिन समय के साथ बढती मांग को देखते हुए कई विश्वविद्यालय आर्ट्स के छात्र को भी इस क्षेत्र में प्रवेश देते हैं. बीसीए यानी बैचलर इन कम्पूटर अप्लीकेशन के लिए 10+2 पर आर्ट्स, साईंस या कॉमर्स की कोई बाध्यता नहीं है. हालांकि, बीएससी (कंप्यूटर साईंस) या बीएससी (आई टी) में प्रवेश के लिए ज्यादातर विश्वविद्यालय 10+2 में गणित मांगते हैं. अगर आपकी रूचि कंप्यूटर साईंस में है, तो आप बेशक बीसीए पाठ्यक्रम को चुन सकते हैं.

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INDIAN ARMY: देश के युवाओं का एक तबका ऐसा भी है, जो अपने रोज़गार के साथ साथ देश की सेवा भी करना चाहता है. अगर आप भी उन युवाओं में शामिल हैं, तो आर्ट्स के छात्र के रूप में आपके लिए यहां भी इंडियन आर्मी के दरवाज़े खुले हुए हैं. 10+2 के बाद आप अपने आर्ट्स के ग्रेजुएशन करें, और साल में दो बार होने वाली सीडीएस की प्रवेश परीक्षा में भाग लें.

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CHARTERED ACCOUNTANCY AND SECRETARYSHIP: अब कॉमर्स के साथ ही 10+2 आर्ट्स के छात्रों के लिए भी यहां के दरवाजे खुले हुए हैं. आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि भारतीय चार्टर्ड अकाउन्टेंसी की मांग कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देशों में है. अंतर्राष्ट्रीय अवसरों के कारण भारतीय चार्टर्ड अकाउन्टेंसी और कंपनी सेक्रेटरीज युवाओं के लिए अग्रिम करियर विकल्प बन गया है.

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FASHION WORLD: युवाओं के मनचाहे करियर विकल्पों में से एक है - फैशन डिजाईनिंग. अगर आपका इंटरेस्ट फैशन डिजाईनिंग में है, तो आर्ट्स के छात्र होते हुए भी आप इसमें प्रवेश कर सकते हैं. आज फैशन डिजाईनिंग में कई स्पेशलायिजेशन विषय भी शामिल हो गए हैं, जैसे फुटवेयर, अपरेल, असेसरीज, फर्नीचर, सेरामिक. उत्कृष्ट संस्थानों में नेशनल इंस्टीच्युट ऑफ फैशन टेक्नोलोजी यानी निफ्ट, एनआईडी यानी नेशनल इंस्टीच्युट ऑफ़ डिजाईन अहमदाबाद का नाम लियाजा सकता है.

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TEACHER: आर्ट्स के क्षेत्र में एक बड़ा तबका टीचिंग को प्रोफेशन बनाता है. अगर आप स्कूल स्तर पर शिक्षक बनना चाहते हैं, तो अपने पसंदीदा विषय में ग्रेजुएशन करें और उसके बाद दो-वर्षीय बी.एड कोर्स पूरा करें. इसके बाद टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट यानि टीईटी उत्तीर्ण कर लें. अगर आपकी योजना कॉलेज या विश्वविद्यालय लेक्चरर बनने की है तो अपने विषय में स्नाकोत्तर के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा साल में दो बार आयोजित जूनियर रिसर्च फेलोशिप ले लें, जिसके तहत आपको अपना रिसर्च और पीएचडी पूरा करने के लिए मासिक फेलोशिप मिलती है. उसके बाद नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट आपको एक लेक्चरर के रूप में स्थापित कर सकता है.

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COMPETITIVE EXAMS: आर्ट्स के छात्रों के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के भी द्वार खुले हुए हैं. रेलवे, सिविल सेवा, इंश्योरेंस, पीएसयू, स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड, स्कूल-कॉलेज लाइब्रेरी जैसे अनगिनत विभागों में आर्ट्स से ग्रेजुएट लाखों छात्र हर वर्ष शामिल होते हैं.

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