संगीत की दुनिया की मशहूर हस्ती आरडी बर्मन यानी कि पंचम दा का आज 76 वां जन्म दिवस है. भले ही आज वे दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी यादें और उनका संगीत आज भी जिंदा है.
उनका जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था. आर डी बर्मन का का पूरा नाम था राहुलदेव बर्मन. उनके पिता सचिन देव बर्मन हिन्दी और बांग्ला फिल्मों के संगीतकार और गायक थे. मां मीरा मशहूर गीतकार थीं.
आरडी बर्मन को उनके नाम से ज्यादा पंचम दा के नाम से जाना जाता है. उनकी दादी उन्हें तुलबू नाम से बुलाया करती थीं.
कहा जाता है कि उन्होंने बोलना शुरू किया तब वह बार-बार सरगम का पांचवा स्वर यानी कि 'पा' दोहराते थे, तभी इसलिए परिवार वालों ने उन्हें प्यार से 'पंचम' बुलाना शुरू कर दिया. कुछ लोग ये भी कहते हैं कि बचपन में जब वो रोते थे तो पंचम सुर की ध्वनि सुनाई देती थी, जिसके चलते इन्हें पंचम कह कर पुकारा गया.
आरडी बर्मन ने 9 साल की उम्र में पहला संगीत कंपोज किया. ये गीत था, 'ऐ मेरी टोपी पलट के आ'. इसे उनके पिता सचिन देव बर्मन ने फिल्म 'फंटूश' में इस्तेमाल किय था.
फिर पंचम दा ने 'सर जो तेरा चकराये' की धुन तैयार की थी. उनकी इस धुन को गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' में लिया गया.
उन्होंने हिन्दी के अलावा बंगला, तमिल, तेलगु, और मराठी में भी संगीत दिया. फिल्म शोले में 'महबूबा-महबूबा' गाने को आवाज दी. भूत बंगला (1965 ) और प्यार का मौसम (1969) में इन्होने अभिनय भी किया.
पंचम दा ने करीब 300 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया. बतौर संगीतकार उनकी अंतिम फिल्म '1942 ए लव स्टोरी' थी. आर.डी. बर्मानिया-पंचमेमॉयर्स' किताब में कहा गया है कि कि आर.डी.बर्मन को मिर्ची खाने का शौक था और वह अपने नर्सरी गार्डन में अलग-अलग तरह की मिर्ची उगाते थे.
पंचम दा की शादी लता मंगेशकर की छोटी बहन आशा भोंसले के साथ हुई थी.
पंचम दा ने लता मंगेशकर के साथ 'बाहों में चले आओ', 'तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया' जैसे बेहतरीन गाने रिकॉर्ड किए. पंचम दा ने 4 जनवरी 1994 को अंतिम सांस ली.