पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज पुण्यतिथि है. 21 मई 1991 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था. देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री कहलाए जाने वाले राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे. लेकिन हालात ऐसे बने कि वो राजनीति में आए और देश के सबसे युवा पीएम के रूप में उनका नाम दर्ज हो गया. जानें- कैसे वह मां के निधन के बाद तुरंत प्रधानमंत्री बन गए.
जन्म
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को बम्बई (अब मुंबई) में हुआ था. वे 3 साल के थे उनके दादा जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने थे.
जब बनें "एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर"
कुछ महीने पहले मीडिया एडवाइजर संजय बारू की लिखी किताब पर आधारित फिल्म दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर रिलीज हुई. जिसमें मनमोहन सिंह को "एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर" बताया गया था, लेकिन देखा जाए तो राजीव गांधी पर ये टाइटल सही बैठता है. क्योंकि साल 31 अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने. राजनीति के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि जब मां की हत्या के बाद बेटे ने शाम को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली हो.
दिखाई 'कंप्यूटर क्रांति'
राजीव गांधी को भारत में कंप्यूटर क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारत के घरों तक पहुंचाने का काम किया बल्कि भारत में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया. देश की दो बड़ी टेलिकॉम कंपनी एमटीएनएल और बीएसएनएल की शुरुआत उनके कार्यकाल में हुई. उनके इस योगदान ने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया गया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया.
सोनिया गांधी से मुलकात
राजीव गांधी की शादी सोनिया गांधी से हुई. उनकी मुलाकात तब हुई जब वह कैम्ब्रिज में पढ़ने गए थे. साल 1968 में उन्होंने सोनिया से शादी कर ली. उनके दो बच्चे हैं- पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी वाड्रा. उनके बेटे राहुल गांधी वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष हैं.
कहां हुई थी सोनिया से पहली मुलाकात
सोनिया गांधी से राजीव गांधी की पहली मुलाकात एक रेस्टोरेंट हुई थी. खबरें तो ये भी आती रही हैं कि राजीव गांधी ने नैपकिन के एक टुकड़े पर सोनिया के लिए कविता लिख दी और उसके साथ एक शैंपेन की बोतल सोनिया गांधी को देने के लिए कहा था. आपको बता दें, राजीव गांधी सोनिया की तारीफ अक्सर करते थे. वे उन्हें 'the most beautiful woman I know' कहा करते थे.
सोनिया नहीं चाहती थीं कि राजीव कभी प्रधानमंत्री बनें
राजीव गांधी एयरलाइन पायलट की नौकरी करते थे और उसी में खुश थे. वह शुरू से ही राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन मां की हत्या के बाद उन्हें राजनीति में आना पड़ा. वहीं सोनिया गांधी नहीं चाहती थी कि राजीव प्रधानमंत्री बने.
सोनिया ने कही थी ये बात
इंदिरा गांधी को गोली लगने के बाद उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया. उस दौरान ये चर्चा शुरू हो गई थी कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. ऐसे में फैसला हुआ कि राजीव गांधी ही अगले प्रधानमंत्री बने.
राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के पक्ष में सोनिया गांधी बिल्कुल नहीं थी. सोनिया ने कहा था कि अगर आप प्रधानमंत्री बनेंगे तो खतरा आपके ऊपर मंडराता रहेगा. उस वक्त राजीव गांधी ने कहा था "मैं इंदिरा गांधी का बेटा हूं. जो लोग मुझे नहीं पसंद करते हैं वो मुझे वैसे भी नहीं छोड़ेंगे". मेरा .प्रधानमंत्री बनना ही सही है.
आपको बता दें, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने उसी दिन सत्ता संभाली. उसी दिन राजीव गांधी को प्रधानमंत्री की शपथ भी दिलाई गई थी.
सोनिया के पिता नहीं चाहते थे राजीव से हो शादी
राजीव गांधी ने सोनिया को पहली बार एक रेस्टोरेंट में देखा था. राजीव गांधी जब कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे तब वे वहां के ग्रीक रेस्टोरेंट में गए. वहीं उन्होंने सोनिया गांधी को पहली बार देखा और उनसे प्यार हो गया.
सोनिया गांधी के पिता स्टिफनो माइनो नहीं चाहते थे कि उनकी शादी राजीव गांधी से हो, उन्हें दोनों की शादी मंजूर नहीं थी क्योंकि वो भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे थे. आखिरकार 1968 में दोनों की शादी हो गई, जिसके बाद सोनिया गांधी भारत आ गईं और 1983 में उन्होंने भारतीय नागरिकता स्वीकार कर ली.
कैसे- हुआ राजीव गांधी का निधन
राजीव गांधी साल 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान श्रीपेरुमबुदुर में लिट्टे के आत्मघाती हमले का शिकार हुए थे. धनु नाम की महिला हमलावर ने राजीव गांधी के पैर छूने के बाद खुद को बम से उड़ा लिया था. इस हमले में राजीव गांधी के अलावा 14 और लोगों की जान चली गई थी.
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